हमेशा चिकित्सक और मरीजों से भरा रहने वाले पीजीआई में शनिवार को नजारा अलग दिखा।
इमरजेंसी से लेकर ओपीडी और वार्डों में दाखिल मरीज चिकित्सकों का इंतजार करते रहे। जिन वार्डों में रोजाना कई-कई डॉक्टर यूनिट वाइज ड्यूटी पर रहते, शनिवार को पूरे वार्ड में ही मात्र एक सीनियर डॉक्टर नजर आया।
ओपीडी में भी सुबह के समय भीड़ होने के कारण मरीजों को घंटों तक लाइन में खड़े होकर इंतजार करना पड़ा।
वार्डों में हालात रहे बदले-बदले
इमरजेंसी वार्ड से लेकर दूसरे सभी वार्डों में चिकित्सक नहीं बस कराहते मरीज ही दिखे। वार्ड 14 जहां शुक्रवार को झगड़ा हुआ, वहां भी हालात बुरे नजर आए।
वार्ड-14 में तीन यूनिट हैं। इनमें प्रत्येक यूनिट में 24 घंटे दो-तीन चिकित्सक मौजूद रहते हैं। शनिवार को पूरा वार्ड एक महिला चिकित्सक के हवाले रहा। सर्जरी की सभी चारों यूनिट में चिकित्सक नहीं मिले। मेडिसन, सर्जरी, ओर्थोपेडिक समेत अन्य सभी वार्डों में भी कमोबेश हालात कुछ इसी तरह के नजर आए।
एक नजर में पीजीआई
पीजीआई की क्षमता : 2200 बेड
औसतन दैनिक दाखिल मरीज (नए व पुराने) : 1900 से 2000
औसतन दैनिक ओपीडी (नए व पुराने) : 4000 से 5000
एचएसएमटीए चिकित्सक : 360
एचसीएमएस चिकित्सक : 36
सीनियर रेजिडेंट्स : 250
जूनियर रेजीडेंट्स : 400