सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच फ्लैग मीटिंग में संघर्ष विराम के उल्लंघन और दो भारतीय सैनिकों की हत्या से साफ इंकार करने के बाद पाकिस्तान का चेहरा एक बार फिर बेनकाब हुआ है। अतीत के अनुभव बताते हैं कि द्विपक्षीय संबंधों को लेकर उसकी नीयत कभी साफ नहीं रही है, बल्कि भारत की ओर से ही हमेशा उदारता बरती जाती रही है।
अब समय आ गया है कि अपने इस दुस्साहसी पड़ोसी के साथ पूरी सख्ती से पेश आया जाए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उस पर दबाव बनाया जाए। इसके लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाने की जरूरत है, जो फिलहाल नजर नहीं आ रही है। ऐसा नहीं हो सकता कि हमारी सरकार वहां की चुनी हुई सरकार से तो बात करती रहे, या उसके साथ कारोबारी रिश्ते को मजबूत करे और उसकी फौज और आईएसआई हमारे देश के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को अंजाम दें!
सैन्य प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह ने बिल्कुल ठीक कहा है कि 'पाकिस्तान की करतूत माफी के लायक नहीं है और जरूरत पड़ने पर भारत न केवल जवाबी कार्रवाई करेगा, बल्कि आक्रामक रुख भी अपनाएगा।' उनका यह कहना भी ठीक है कि यह घटना सुनियोजित थी।
आखिर इस घटना से कुछ दिन पहले लश्कर सरगना हाफिज सईद ने भी नियंत्रण रेखा के नजदीक मुआयना किया ही था। यह एक बड़ी साजिश का हिस्सा लगता है, जिसके जरिये पाकिस्तान की भारत विरोधी ताकतें कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को तेज करना चाहती हैं। यह अकारण नहीं है कि इस घटना के साथ ही कश्मीर में अचानक पंचायत प्रतिनिधियों पर आतंकी हमले भी बढ़ गए हैं।
गौर करने वाली बात यह भी है कि इस मामले को पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र या किसी तीसरे पक्ष से जांच करवाने की मांग कर 'कश्मीर' मसले का अंतरराष्ट्रीयकरण करना चाहता है। मगर देश के लोग यह कैसे भूल सकते हैं कि मथुरा के शहीद हेमराज की विधवा अपने पति के सम्मान को लेकर कई दिनों से अनशन पर थीं।
दोनों शहीदों के साथ जैसी बर्बरता की गई, वह सुरक्षा बलों के मनोबल को भी प्रभावित कर सकती है। अब जरूरी है कि पाकिस्तान पर कड़ा दबाव बनाया जाए, ताकि वह माफी मांगे और दोबारा ऐसी हरकत के बारे में सोचे भी नहीं।