धारा 134ए के तहत रविवार को तीसरी से नौवीं कक्षा के गरीब विद्यार्थियों की परीक्षा अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ गई। परीक्षा राजकीय सीनियर सेकेंडरी विद्यालय में हुई। अभिभावकों के साथ परीक्षा देने पहुंचे कुछ विद्यार्थियों को उस समय निराशा हाथ लगी, जब स्कूल प्रशासन की ओर से जारी की गई लिस्ट में उनका नाम ही नहीं मिला। इसे शिक्षा विभाग की लापरवाही कहें या स्कूल प्रशासन की, लेकिन इस लापरवाही की वजह से बहुत से गरीब विद्यार्थियों का निजी स्कूलों में दाखिला लेने का सपना धरा रह गया।
शिक्षा बोर्ड ने लर्निंग लेवल परीक्षा सुबह 9 बजे रखी थी। परीक्षा केंद्र पर सुबह आठ बजे से ही बच्चे अपने अभिभावकों के साथ पहुंचाने लगे थे। सुबह नौ बजे परीक्षा शुरू हुई, लेकिन कुछ बच्चों का रिकार्ड परीक्षा केंद्र में उपलब्ध नहीं होने के कारण वे परीक्षा से वंचित रहे गए। बूढ़ा बाबा बस्ती से अपने पिता सत्यवान के साथ चौथी कक्षा में दाखिले के लिए परीक्षा देने पहुंचे गौरव ने कहा कि विद्यालय में जो अनुक्रमांक की लिस्ट लगाई गई है, उसमें उसका नाम नहीं था। साथ आए उनके पिता सत्यवान ने बताया कि जब इस विषय में स्कूल प्रशासन से बात की गई तो उन्हें बताया गया कि चंडीगढ़ से जो लिस्ट आई है, उसमें उनका नाम नहीं है। इस कारण उनका लड़का परीक्षा देने से वंचित रह गया। गौरव की ही तरह ऐसे बहुत से विद्यार्थी परीक्षा देने से वंचित रह गए, जिनके नाम शिक्षा विभाग की तरफ से जारी नहीं किए गए थे। विद्यार्थियों के साथ आए परिजनों का आरोप है कि उनके पास इंटरनेट से निकली गई रोलनंबर स्लिप है, लेकिन विद्यालय में लगी लिस्ट में उनके बच्चों का नाम नहीं है। डाहौला गांव से परीक्षा देने आए अजय पुत्र शशि कपूर, साहिल पुत्र सुरेश कुमार, अंकू पुत्री खुशीराम ने कहा कि उनके पास इंटरनेट से निकाली गई रोल नंबर स्लिप है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया। उन्होंने विभाग की सभी शर्तों का पालन करते हुए फार्म के साथ सभी कागजात भेजे थे। विभाग की तरफ से जारी लिस्ट में उनका नाम न होने की वजह से सभी परीक्षा में बैठने से वंचित रह गए। इसी प्रकार डाहौला गंाव से परीक्षा देने पहुंचे अरुण भी रिकार्ड नहीं मिलने के कारण वंचित रह गए।
बॉक्स
केवल 445 विद्यार्थी ही परीक्षा देने पहुंचे
शिक्षा विभाग की गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा दिलाने की योजना शुरुआत के साथ ही दम तोड़ गई। नियम 134 के तहत शिक्षा विभाग द्वारा निजी स्कूलों में 10 प्रतिशत गरीब बच्चों के निशुल्क दाखिले लेना अनिवार्य किया गया है। इसी क्रम में शिक्षा विभाग के पास कक्षा तीसरी से नौवीं कक्षा तक के लिए 1300 गरीब बच्चों के आवेदन शिक्षा विभाग के पास पहुंचे थे, लेकिन परीक्षा देने के लिए केवल 445 प्रतिभागी ही राजकीय सीनियर सेकेंडरी विद्यालय पहुंचे। ऐसे परीक्षार्थी भी थे, जिनका इंटरनेट पर जारी की गई लिस्ट में तो नाम था, लेकिन विद्यालय में जारी की गई लिस्ट में उनके नाम नहीं भेजे गए। विभाग की आधी-अधूरी तैयारियों की वजह से बहुत से विद्यार्थी परीक्षा में बैठने से वंचित रह गए।
बॉकस
परीक्षा केंद्रों पर सवाल
बच्चों की परीक्षा दिलाने पहुंचे अभिभावकों ने परीक्षा केंद्रों पर भी सवाल उठाए हैं। डाहौला गांव निवासी ऋषि व अमन ने बताया कि पूरे जिले के उम्मीदवारों को जींद में ही बुलाया गया है। इससे बहुत ही कम विद्यार्थी परीक्षा देने पहुंचे। अधिकतर अभिभावकों को परीक्षा की जानकारी भी नहीं थी। शिक्षा विभाग को पत्र व्यवहार से परीक्षा की जानकारी देनी चाहिए थी।
बॉक्स
जो विद्यार्थी आए उनकी परीक्षा करवाई
शिक्षा विभाग के पास जो लिस्ट हमारे पास आई है, उसके अनुसार विद्यार्थियों को परीक्षा में बैठा दिया गया। जिन विद्यार्थियों का नाम लिस्ट में नहीं था और उनके पास इंटरनेट से निकलावा हुआ आवेदक क्रमांक या परीक्षा संबंधी अन्य सबूत थे, उनको परीक्षा में बैठाया गया है। इस प्रकार के 19 विद्यार्थी उनके पास पहुंचे थे, कागजात की जांच के बाद उनको परीक्षा कक्ष में बैठा दिया गया।
सुरेश बंसल, प्राचार्य, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय
फोटो कैप्शन
11जेएनडी 08 : विद्यालय में लगी लिस्ट में नाम न होने के कारण परीक्षा देने से वंचित विद्यार्थी व अभिभावक अपने रोल नंबर दिखाते हुए।
11जेएनडी 09 : परीक्षा देने से वंचित रहा गौरव अपनी रोल नंबर स्लिप दिखाता हुआ।
11जेएनडी 10 : परीक्षा देकर स्कूल से बाहर आते विद्यार्थी।
11जेएनडी 11 : राजकीय सीनियर सेकेंडरी विद्यालय के प्राचार्य सुरेश बंसल।