सूबे के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के औचक निरीक्षणों से भयभीत पीजीआईएमएस प्रशासन ने आपात विभाग की खामियां जगजाहिर न हों, इसके लिए यहां मीडिया के प्रवेश पर ही प्रतिबंध लगा दिया है।
सबसे अधिक अव्यवस्था इसी विभाग में ही देखने को मिलती है, जिसमें आर्थों और बाल रोग अव्वल पर हैं।
आपात विभाग के सभी द्वारों पर नोटिस चस्पाया गया है कि किसी भी मीडिया कर्मी को अंदर प्रवेश न करने दिया जाए। इसमें मरीजों की फोटो लेने और चिकित्सकों का कार्य बाधित करने को मुद्दा बनाया गया है।
हैरानी की बात है कि यहां से मरीजों को निजी अस्पताल भेजा जाता है, इसकी सुध किसी को नहीं है। विभाग में निजी अस्पतालों के कर्मचारी और यहां के कुछ चिकित्सकों की मिलीभगत के चलते यह गोरखधंधा जारी है। गत वर्ष पहले ऐसे ही एक मामले में एक पीजी चिकित्सक को एक निजी अस्पताल संचालक ने धमकाया था। इस मामले पर संस्थान के मुख्य जांच अधिकारी एवं सर्जरी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आरएस दहिया ने संज्ञान लिया था, लेकिन पुलिस में मामला दर्ज न होने के चलते बात दब गई।
मुझे जानकारी नहीं : कुलपति
आपात विभाग में मीडिया के प्रवेश के रोक के संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। इस संबंध में वे जल्द ही निदेशक और एमएस से बात करेंगे। आपात विभाग में किसी की कोताही को सहन नहीं किया जाएगा, यहां संदिग्ध अवस्था में घूम रहे लोगों को पकड़ने के लिए सुरक्षा अधिकारी को कहा जाएगा। ---डॉ. वीके जैन, कार्यवाहक कुलपति
पांच सुरक्षाकर्मियों का काटा वेतन
आपात विभाग में मीडिया कर्मियों का प्रवेश करना प्रशासन को इतना खला है कि उन्होंने पांच सुरक्षा कर्मियों का वेतन काटने के आदेश जारी कर दिया। इस घटना से सुरक्षाकर्मियों में रोष है कि उन पर नाजायज आरोप लगा कर तंग किया जाता है। चिकित्सक अपने गलत कामों को छुपाने के लिए अक्सर उन पर ही अपना आक्रोश जाहिर करते हैं।