विधानसभा चुनावों से पहले से टलती आ रही नगर निगम हाउस की बैठक की तारीख आखिरकार फाइनल हो गई है। बैठक अब 10 नवंबर को होगी।
मेयर ने सभी पार्षदों को पत्र लिखकर सोमवार तक अपने वार्डों के विकास कार्यों की सूची भी भेजने को कहा है।
ताकि उनके कार्यों को हाउस की बैठक में शामिल किया जा सके। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद शहरी सरकार की पहली हाउस की बैठक कई मायनों में विशेष मानी जा रही है।
एक ओर जहां बैठक में कांग्रेस अपनी एकजुटता बनाए रखने का प्रयास कर रही है, वहीं भाजपा पार्षद भी मेयर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए जोड़तोड़ में जुटे हुए हैं। ऐसे में निगम की बैठक को निगम में मचने वाले कोहराम का सेमिफाइनल माना जा रहा है।
सत्ता परिवर्तन के साथ ही कई पार्षदों ने कांग्रेस समर्थित मेयर रेनू डाबला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए अंदरखाते मोर्चा खोल दिया है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेसी भी शहर में अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए एकजुट होकर अपनी ताकत को बनाए रखने में जुटे हैं। खैर कुछ भी हो, लेकिन भाजपा समर्थित पार्षदों द्वारा मांगपत्र देने से पूर्व ही मेयर द्वारा सभी पार्षदों से बैठक के लिए एजेंडा मांग कर उन्हें यह जरूर बता दिया है कि वह राजनीति में उनसे कमजोर नहीं हैं।
काफी हंगामेदार हो सकती है बैठक
पार्षद काफी लंबे समय से हाउस की बैठक का इंतजार कर रहे थे। इस मायने में तो यह बैठक काफी अहम है, साथ ही पार्षदों के मन में निगम द्वारा विकास कार्यों को समय पर पूरा करवाना तो दूर रद करने के कारण काफी रोष पनप रहा है। निगम अधिकारियों का लचर रवैया भी पार्षदों में रोष का बड़ा कारण माना जा रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि बैठक काफी हंगामेदार हो सकती है।
पार्षद जैसा चाहेंगे वैसा होगा : मेयर
मेयर रेनू डाबला का कहना है कि सभी पार्षदों को पत्र भेजा गया है और उनसे विकास कार्यों की सूचि मांगी गई है। ताकि उन्हें बैठक के एजेंडे में शामिल किया जा सके। बैठक 10 नवंबर को होने की पूरी संभावना है और इसकी घोषणा सोमवार को की जा सकती है। बैठक के बारे में उन्होंने साफ कहा कि बैठक काफी बढ़िया होगी। सारा कांग्रेस परिवार एकजुट है, ऐेसे में उनकी कुर्सी को फिलहाल कोई खतरा नहीं है। लेकिन, साथ ही ये भी कहा कि यह कुर्सी पार्षदों की है, पार्षद जैसा चाहेंगे वैसा ही होगा।
ये चल रहा है शहर सरकार में खेल
बता दें कि भाजपा के इस समय 7 पार्षद हैं, जबकि एक पार्षद इनेलो से और एक आजाद उम्मीदवार हैं। वहीं, कांग्रेस के भी दो-तीन पार्षद भीतरखाते भाजपा नेताओं के सीधे संपर्क में हैं। ऐसे में भाजपा पार्षद किसी भी हालत में मेयर पद पाने के लिए भागदौड़ में लगे हुए हैं। मेयर भी सत्ता बचाए रखने के लिए अपने समर्थित पार्षदों को जोड़े रखने की जुगत में हैं। इसके लिए कांग्रेस के कई पार्षदों से एकजुट रहने की बात भी कही जा रही है।