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आतंक की जमीन न बन जाए मुजफ्फरनगर

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अब तक ये बात आशंका भर थी कि आतंकी संगठन मुजफ्फरनगर राहत शिविरों में रह रहे दंगा पीड़ितों के संपर्क में हैं। लेकिन पुलिस के नए खुलासों के बाद ये तय हो गया है कि मुजफ्फरनगर दंगों ने नफरत की जो जमीन तैयार की है, लश्कर जैसे संगठनों ने वहां आतंक के बीज बोने की कोशिश शुरू कर दी है। राहत शिविरों की दुर्दशा, ठंड से बच्चों की मौतें और अखिलेश सरकार की हर मोर्चे पर नाकाम रहने के बाद जैसे हालात उभर रहें हैं, उसके बाद ये चुनौती बढ़ती ही जाएगी। गुजरात दंगों के बाद भारत ने आंतकी वारदातों का सिलसिला देखा है। मुजफ्फरनगर दंगे उस सिलसिले की अगली कड़ी न बन जाएं, इसके लिए राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों को चेतना होगा। सांप्रदायिकता की उस जमीन को कमजोर करना होगा, जिस पर दंगे के बीज दरख्त बनते हैं।
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