ऑनलाइन बिजनेस पोर्टल फ्लिपकार्ट ने महज दस घंटे में छह सौ करोड़ रुपये का कारोबार कर बदलते बाजार की तस्वीर दिखाई है। हालांकि देश के 2.35 लाख करोड़ रुपये सालाना के कुल खुदरा कारोबार में अभी ई-कॉमर्स की हिस्सेदारी एक फीसदी से भी कम है, मगर यह भी सच है कि शहरी मध्य वर्ग में ऑनलाइन कारोबार के प्रति रुझान तेजी से बढ़ता जा रहा है।
अमूमन भारतीयों के लिए बाजार जाना किसी सांस्कृतिक यात्रा से कम नहीं रहा है और जब तक वह चीजों को उलट-पुलट कर देख न लें, हाथों से उसे छूकर देख न लें, किसी भी सामान पर उनका भरोसा जमता नहीं है! मगर ऑनलाइन कारोबार इस चलन को बदल रहा है। खुदरा सामानों की खरीद के बढ़ते सिलसिले ने ई-कॉमर्स के कारोबार में नई संभावनाएं पैदा कर दी हैं, जिसमें इसी मध्यम वर्ग की बड़ी भूमिका कही जा सकती है।
इस बाजार में कारोबार की बढ़ती गुंजाइश का पता इससे चलता है कि हर छह महीने में औसतन पांच ई-कॉमर्स कंपनियां मैदान में उतर रही हैं। यही नहीं, भारत में दस्तक दे चुकी अमेजन के प्रमुख जेफ बेजोस ने भारत में दो अरब डॉलर के निवेश की घोषणा कर रखी है और कई दिग्गज कंपनियां इस बाजार में उतरने को उतावली हैं। ई कॉमर्स से खुदरा बाजार को अभी बड़ी चुनौती भले न हो, लेकिन इसने खरीदारों की राह आसान कर दी है और उसके पास विकल्प भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
लेकिन इसका दूसरा पक्ष यह भी है कि अभी 60 फीसदी ई कारोबार देश के सिर्फ दस बड़े शहरों तक ही सीमित है और पचास हजार करोड़ रुपये के इस कारोबार में से 80 फीसदी कारोबार हवाई जहाज, ट्रेन और बसों से होने वाली यात्रा के सिलसिले में किए जाने वाले भुगतान के रूप में होते हैं।
इसके अलावा ऑनलाइन खुदरा कारोबार करने वाली कंपनियों की अपनी सीमाएं भी हैं, जिसका नजारा फ्लिपकार्ट की बिग बिलियन डे योजना के दौरान मची अफरा तफरी के रूप में दिखा, जब एक साथ इस साइट पर इतने लोग आ गए कि यह साइट ही कई बार क्रैश हो गई! मगर इससे भी अहम बात यह है कि अभी देश में महज 25 करोड़ लोग तक ही इंटरनेट की पहुंच है। यानी ई कॉमर्स के विस्तार के लिए जरूरी यह भी है कि इंटरनेट का भी विस्तार हो।