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लातविया

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उत्तर पूर्वी यूरोप में स्थित लातविया यूरो जोन में शामिल होने वाला 18वां देश बन गया है। पिछले करीब 25 वर्षों में यह तीसरा मौका है, जब इस देश ने अपनी मुद्रा में बदलाव किया है। पहले इसकी मुद्रा रूबल थी, फिर लात्स और अब यूरो इसकी मुद्रा हो गई है। करीब 20 लाख की आबादी वाला यह देश सदियों तक कृषि प्रधान रहा और इसकी अर्थव्यवस्था मछली पकड़ने, समुद्री कार्य एवं वनों पर निर्भर रही। 13वीं से बीसवीं शताब्दी तक यह विदेशी शासन के अधीन रहा, लेकिन अपनी अनूठी भाषा, समृद्ध संस्कृति एवं संगीत-परंपरा को बचाने में कामयाब रहा।
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प्रथम विश्वयुद्ध के बाद इसे 1918 में रूस से स्वतंत्र कर दिया गया। पर द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पूर्व सोवियत संघ में इसका विलय कर दिया गया। सोवियत शासन के दौरान यहां भारी औद्योगिकीकरण हुआ और रूस से बड़ी तादाद में लोग यहां आकर बस गए।

मगर सोवियत संघ के विघटन के बाद इसने पुनः स्वतंत्रता हासिल कर ली और 2004 में यूरोपीय संघ और नाटो का सदस्य बन गया। यहां की एक चौथाई आबादी रूसी भाषी है, जिनके अधिकारों का मुद्दा आजादी के बाद से सरकार के लिए एक बड़ी समस्या रही है। 2006 में नागरिकता कानून को भी कठोर बना दिया गया और तीन बार लातवियाई भाषा की परीक्षा में विफल रहने वालों को नागरिकता नहीं दी जाती।
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इसने मुक्त बाजार को तेजी से ग्रहण किया। 2004 से 2007 के दौरान इसकी अर्थव्यवस्था ने 50 प्रतिशत विकास किया, लेकिन 2008-09 के आर्थिक संकट ने इसे बुरी तरह प्रभावित किया। बेरोजगारी का संकट इतना गहरा है कि वहां के युवा रोजगार की तलाश में विदेश पलायन कर रहे हैं, जिसके चलते 2000 से 2011 के बीच आबादी में 13 फीसदी की गिरावट आई है।
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