अरविंद केजरीवाल पर स्याही तब फेंकी गई है, जब अन्ना हजारे के साथ उनके मतभेद सतह पर दिखाई देते हैं, लेकिन दोनों के बीच की गलतफहमी क्या सचमुच इतनी बड़ी है कि अन्ना के किसी नाराज समर्थक को यह कदम उठाना पड़े!
इसमें शक नहीं कि अपने नाम के दुरुपयोग से चिंतित अन्ना हजारे ने अरविंद केजरीवाल को पिछले दिनों एक चिट्ठी लिखकर कई मुद्दों पर उनसे सफाई मांगी थी। यह भी सच है कि आप के मुखिया ने पत्रकारों की मौजूदगी में जवाबी चिट्ठी सार्वजनिक कर अन्ना हजारे को क्षुब्ध कर दिया है। लेकिन दोनों के बीच की यह असहमति इतनी भी बड़ी नहीं है, जितना बताया जा रहा है। बल्कि मानने का कारण है कि अन्ना और केजरीवाल के बीच मतभेद का राजनीतिक फायदा कोई और उठाना चाहता है।
दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले आप के मुखिया को निशाना बनाने में उन्हीं की दिलचस्पी ज्यादा होगी, जिनको उनसे खतरा है। खुद अन्ना ने कहा है कि वह स्याही फेंकने वाले के बारे में नहीं जानते। इसी तरह अब यह जानकारी भी सामने आ रही है कि अरविंद केजरीवाल पर कालिख फेंकने वाले नचिकेता 2009 तक नहीं, पिछले साल तक भाजपा के सदस्य थे। आप की बढ़ती लोकप्रियता से आशंकित बड़ी पार्टियां उसे घेरने की जुगत में हैं, यह तथ्य किसी से छिपा हुआ नहीं है।
पहले कांग्रेस ने उसकी विदेशी फंडिंग का मुद्दा उठाया, और अगर नचिकेता के बारे में आए तथ्य सही हैं, तो आप को बदनाम करने की साजिश अब भाजपा रच रही है। लेकिन इस तरह की कोशिशों से इन सियासी दलों का ही ज्यादा नुकसान होगा। आप की विदेशी फंडिंग का मुद्दा उठाकर कांग्रेस और भाजपा पहले ही घिर चुकी हैं। फंडिंग के मामले में खुद उनकी गोपनीयता सवालों के घेरे में है।
अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक तौर-तरीकों से असहमतियां हो सकती हैं, लेकिन उन्होंने अपनी पार्टी को मिलने वाले चंदों को सार्वजनिक कर पारदर्शिता दिखाई है। अरविंद केजरीवाल की राजनीतिक महत्वाकांक्षा से अन्ना हजारे भले सहमत न हों, पर वह यह तो मानेंगे कि आम आदमी पार्टी कमोबेश उन्हीं नीतियों पर चल रही है, जिसे उन्होंने शुरू किया था। लिहाजा इस मोड़ पर केजरीवाल से असहमति जताकर वह उस आंदोलन को ही कमजोर करेंगे।