शारीरिक कमी की वजह से फेंक दिए गए मासूम की हालत में सुधार होने लगा है।
बच्चा पीजीआई के वार्ड-14 की नर्सरी में ही है। दूध पीने के साथ उसके चेहरे पर मुस्कान आने लगी है। बच्चे का इलाज कर रहे पीजीआई के डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ के अलावा जनसेवा संस्थान की टीम भी उसकी देखभाल में लगी हुई है। उम्मीद जताई जा रही है कि बच्चा जल्द स्वस्थ हो जाएगा।
पीजीआई में भर्ती यह नवजात रविवार सुबह आठ बजे गुड़गांव के खांडा रोड पर झाड़ियों से एक नर्स को मिला था। चूहों ने भी बच्चे को कई जगहों से नोंच लिया था।
प्राइवेट अस्पताल में जांच हुई तो पता चला कि बच्चे का मलद्वार ही नहीं है। स्थानीय पुलिस को सूचना देने और प्राथमिक उपचार के बाद उसे सोमवार दोपहर करीब एक बजे पीजीआई भेज दिया गया। पीजीआई में बाल सर्जन डॉ. के.एन. रतन ने शाम 6:30 बजे उसका ऑपरेशन कर अस्थाई मलद्वार बना दिया था। उम्मीद की जा रही थी कि मंगलवार को उसे वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाएगा, लेकिन फिलहाल उसे नर्सरी में रखा गया है।