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गर्भ में बच्चे की मौत, डॉक्टर बोले दो दिन बाद आना

Thu, 09 Oct 2014 02:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ रोहतक
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पीजीआई में एक बार फिर डॉक्टरों की लापरवाही एक जननी की जिंदगी पर बन आई।
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गर्भ में पल रहे पांच माह के बच्चे की कई दिनों पहले हुई मौत के बावजूद डिलीवरी न कराकर डॉक्टरों ने जननी को दो दिन बाद आने की सलाह दे दी। जब प्रसूति घर पहुंची तो अचानक तबियत बिगड़ते देख परिजनों ने मजबूरन प्राइवेट अस्पताल का सहारा लिया।

हालात देखते हुए डॉक्टरों ने तुरंत डिलीवरी कराकर जननी की जान बचाई।
सोनीपत स्टैंड निवासी पवन ने बताया कि वह अपनी गर्भवती पत्नी कंचन को नियमित जांच कराने के लिए शहर के एक निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र में ले गया था। वहां पता चला कि गर्भ में पल रहा बच्चा लगभग दो दिन पहले मर चुका है। इसकी जांच के लिए पत्नी को जब वह सात अक्टूबर को पीजीआई के स्त्री रोग विभाग में ले गए तो यहां चिकित्सकों ने इलाज के लिए दिन भर बैठाए रखा। शाम करीब चार बजे अल्ट्रासाउंड जांच की। जांच के बाद चिकित्सकों ने बताया कि बच्चा काफी समय पहले ही गर्भ में मर चुका है।
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फाइल पर लिख दो और ले जाओ
 पीजीआई के वार्ड दो में जच्चा के गर्भ में पांच माह के बच्चे के मृत होने की जानकारी मिलने के बाद भी उपचार नहीं दिया गया। पवन ने बताया कि पत्नी को देखने के बाद चिकित्सकों ने कहा कि मरीज को दवा दे रहे हैं और डिलीवरी दो दिन बाद करेंगे। वह मरीज को घर ले जाएं और फाइल में बस वह लिख दें कि वह अपनी इच्छा से मरीज को ले जा रहे हैं।

टालमटोल से जान पर बन आई
रात को घर ले जाने पर जब मरीज को समस्या हुई तो उसे एक निजी अस्पताल ले जाना पड़ा और चिकित्सकों ने तत्काल मरीज का एडमिट कर लिया। डिलीवरी करवाकर डिस्चार्ज कर दिया। परिजनों ने बताया कि निजी अस्पताल के डॉक्टर ने बताया कि अगर थोड़ी भी देर हो जाती तो जननी की जान पर बन सकती थी। परिजनों ने रोष जताते हुए बताया कि पीजीआई में मरीज की देखभाल नहीं होती, चिकित्सक टालमटोल में जुटे रहते हैं।

बोली विभागाध्यक्ष
मरीज को जांचा गया था, इसके बाद मरीज को भेजा गया या परिजन स्वयं उसे घर ले गए इसकी जानकारी नहीं है। इस संबंध में संबंधित चिकित्सकों से बात करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।  
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- डॉ. स्मिति नंदा, विभागाध्यक्ष, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग, पीजीआई

बोली महिला चिकित्सक
गर्भ में बच्चे के मरने के बाद जच्चा को दर्द शुरू हो जाता है। महिला को दवा दी जाती है और नार्मल डिलीवरी करवाने का प्रक्रिया शुरू की जाती है। यदि मृत बच्चे की डिलीवरी समय पर न कराई जाए तो महिला का रक्त खराब हो जाता है। रक्त में कोबोलेशन प्रोफाइल की समस्या हो जाती है, समस्या अधिक होने पर मरीज की जान को भी खतरा रहता है। मां और बच्चे का रक्त प्रवाह एक जैसा होने के कारण भी खतरा बना रहता है। बच्चे के मृत होने की जानकारी मिलने के तुरंत बाद ही डिलीवरी कराई जानी आवश्यक है।
- डॉ. सीमा, गाइनोकोलोजिस्ट
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