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नवजात की मौत पर हंगामा

Mon, 08 Sep 2014 02:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ रोहतक
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प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान पीजीआई में अव्यवस्था और लापरवाही के कारण एक और नन्ही जान को नहीं बचाया जा सका।
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यहां के बाल रोग विभाग में रविवार को नवजात की मौत पर परिजनों ने चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। हंगामे के दौरान बहन जी कहने पर एक महिला चिकित्सक पीड़ित परिवार पर बिफर गई और अभद्रता की।

बता दें कि जिंदगी की आस में पीजीआई रेफर होकर आने वाले बच्चों को यहां वेंटिलेटर और नीकू में जगह नहीं मिल पा रही है। कुछ दिन पहले भी यहां 20 मिनट के भीतर दो नवजात ने दम तोड़ा था।
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ये है मामला
गुड़गांव के खलेलपुर बलेवा गांव निवासी रणजीत ने बताया कि उसकी पत्नी ललिता ने एक सितंबर को रेवाड़ी के सामान्य अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया।

दो घंटे बाद भी बच्चा नहीं रोया तो चिकित्सकों ने उसे रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया। आपात विभाग में उपचार के बाद बच्चे को वार्ड 16 में शिफ्ट कर दिया गया।

नवजात की मां ललिता ने आरोप लगाया कि वार्ड में बच्चे की देखभाल में कोताही बरती गई। कई बार निवेदन के बाद भी कोई सुनने को तैयार नहीं था। रात को बच्चे की तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर नर्सिंग स्टाफ से देखने के लिए कहा, लेकिन किसी ने इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया।

डॉक्टर के बुलाने के निवेदन को भी अनसुना कर दिया। परिजनों ने आरोप लगाया है कि इसी अनदेखी के चलते बच्चे की जान चली गई। रविवार सुबह बच्चे की मौत पर वार्ड में परिजनों ने डॉक्टर और स्टाफ पर जमकर आरोप लगाए और उन्हें नवजात की मौत का जिम्मेदार ठहराया।
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बहन जी नहीं डॉक्टर साहिबा कहिए
मृतक बच्चे के दादा चंद्रप्रकाश ने बताया कि लापरवाही पर जब बोलने गए तो स्टाफ ने भी भला बुरा कहा। उन्होंने वार्ड 16 की एक महिला चिकित्सक को बहन जी कह दिया। इस पर वह डॉक्टर बिफर गई और चंद्रप्रकाश पर बरस पड़ीं। आरोप है कि डॉक्टर ने उल्टे उन्हीं से सवाल करना शुरू कर दिए कि क्या वह उन्हें बहन जी दिखाई देती हैं। सीधे डॉक्टर साहिबा कहो। डॉक्टर ने सरेआम अपशब्द कहे। परिजनों का आरोप है कि एक डॉक्टर यदि इतनी अभद्रता करती है तो स्टाफ क्या करेगा? मांग की कि प्रबंधन को स्टाफ के इस रवैये पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
बोले अधिकारी
मामले की कोई लिखित शिकायत नहीं आई है। जानकारी संबंधित विभाग से ली जाएगी।
- डॉ. चांद सिंह ढुल, निदेशक, पीजीआईएमएस, रोहतक।
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