‘जीएम सर, आप हमारी सुनतै नहीं। जै सीएम की कोठी पर तै फोण आ ज्यागा तै आप दौड़ कै सुनोगै। हम किस धोरै जावां। म्हारै तै तो शुक्रवार नै भी झूठ बोल दिया। आज ना तो हाम किसै की बात सुना अर ना हाडै़ तै जावां।
जै म्हारी बस नहीं लागी तै हम पढ़ण क्यूकर आवांगै। हमनै नहीं बैरा, बस हमनै तै बस चाहिए। लड़के बस मै नही चढ़न देते अर कमेंट करै जा सैं’
कसरैंटी, अटायल, नौनंद, दतौड़, गिझी और पाकस्मा गांव की छात्राएं पांच दिन में तीसरी बार स्पेशल बस की मांग को लेकर बस स्टैंड पहुंच गई।
शहर के अलग-अलग कॉलेजों में पढ़ने वाले करीब 40 छात्र-छात्राएं सोमवार दोपहर को गुस्साए हुए बस स्टैंड पर पहुंचे। छात्राएं इस कद्र गुस्साई थीं कि उन्होंने नीचे किसी अधिकारी की नहीं सुनी और सीधे जीएम रोडवेज से मिलने उनके कार्यालय में पहुंच गई।
कार्यालय में जबरन घुसी
जीएम कार्यालय के बाहर कर्मियों ने छात्राओं को अंदर जाने से रोक दिया। इसी बीच भीतर से कहा गया कि दो छात्राओं को भेज दो। लेकिन सभी छात्राएं एकजुट रहीं। जैसे ही दो छात्राएं अंदर गई तो उनकी सहेलियां भी जबरन गेट खोलकर अंदर घुस गईं।
जीएम को खूब सुनाई खरी-खोटी
देखते ही देखते छात्राओं ने रोडवेज जीएम को घेर लिया और खरी खरी सुनानी शुरू कर दी। जीएम उन्हें समझाने लगे, लेकिन छात्राएं कुछ सुनने के मुड़ में नहीं थीं। गुस्साई छात्राओं रेणु, वीना, साक्षी, प्रवीण, नेहा, जसमिंदर, अमित, सुनीता, ज्योति, रजनी, मीनू, विजय और आनंद ने कहा कि सुबह साढ़े सात बजे एक बस गांव में जाती है तो उन्हें चढ़ने भी नहीं दिया जाता। ऊपर से उन पर इस तरह के कमेंट्स किए जाते हैं कि सहन करने मुश्किल हो जाते हैं। छात्राओं ने जीएम से साफ कहा कि ‘एक दिन मौके पर चलकर देखो तो असलियत पता चल जाएगी।’ अब ऑटो वालों ने भी बैठाने से मना कर दिया है।
सीएम कार्यालय से फोन आए तो एकदम सुनोगे
आक्रोशित छात्राओं ने कहा कि हमें बस के लिए दुखी होते हुए 20 दिन हो गए हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। यदि सीएम ऑफिस से फोन आएगा तो आप तुरंत सुनेंगे।
छात्राओं ने जीएम से स्पेशल बस की मांग की। उन्होंने कहा कि भले ही दिनभर बस न चलाएं, लेकिन सुबह लाने के लिए और दोपहर को 3 बजे यहां से बस चलाएं ताकि छात्राओं को सहूलियत हो।
जीएम मनीष कुमार लोहान ने छात्राओं से बुधवार तक का समय मांगा। छात्राएं बुधवार तक अल्टीमेटम देकर वहां से रवाना हो गई।
170 में से 28 बसें स्पेशल
‘रोहतक डिपो में कुल 170 बसें हैं। उनमें से भी 28 बसें स्पेशल चल रही हैं। ऐसे में एक और स्पेशल बस चलाना मुश्किल है। यदि लंबे रूट पर बस नहीं भेजी जाए तो डिपो घाटे में जाता है। छात्राओं की समस्या के समाधान के लिए कोई न कोई हल जरूर निकाला जाएगा।’
मनीष कुमार लोहान, जीएम, हरियाणा रोडवेज, रोहतक।