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गंगा और रामगंगा का जलस्तर थमा, पर कटान तेज

Sat, 12 Aug 2017 11:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद
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गांव रामपुर में पानी में डूबी झोपड़ी - फोटो : अमर उजाला
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फर्रुखाबाद। गंगा और रामगंगा के जलस्तर में गिरावट हुआ है। इसके बावजूद तराई क्षेत्र के गांवों का कटान तेज है। दोनों नदियों में लगातार पानी बांधों से छोड़ा जा रहा है। इस कारण अभी खतरा टला नहीं है। शनिवार को नरौरा बांध से गंगा में 194077 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। गंगा के जलस्तर में पांच सेंटीमीटर की कमी हुई है। जलस्तर 136.85 से घटकर 136.80 मीटर पर आ गया है। रामगंगा में खो हरेली रामनगर से 9555 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। शाम को रामगंगा का जलस्तर 135.15 मीटर पर आ गया है। इसके बावजूद खेतों में फसल जलमग्न होने से बर्बाद हो रही हैं। गांव रामपुर में पानी भरने से ग्रामीणों की झोपड़ी डूब गई हैं।
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अमृतपुर प्रतिनिधि के अनुसार तहसील क्षेत्र के गांव अलादपुर भटौली के पास रामगंगा में बाढ़ से कटान होता है। इसको रोकने के लिए वर्ष 2016 में रामगंगा की धारा मोड़ने को करीब 12 लाख रुपये पिछली साल खर्च कर नाला खोदा गया। बकाया खुदाई का काम कुछ माह पूर्व विभाग ने दोबारा काम शुरू कराया। ठेकेदार ने रामगंगा की धारा मोड़ने को खोद जा रहे नाले की खुदाई में अनदेखी बरती। कहीं पर नाले की चौड़ाई दो मीटर तो कहीं तीन मीटर की। ठीक से खुदाई न होने से नाले किनारे कि मिट्टी नाली में धस गई। इससे कई जगह नाला बंद हो गया। रामगंगा का जलस्तर बढ़ने पर धारा मोड़ने के लिए जो नाला बनाया गया, उसमें रामगंगा का पानी नहीं गया। रामगंगा की धारा ने गांव अलादपुर भटौली का कटान करना शुरू कर दिया। नाला सूखा पड़ा हुआ है। गांव के शिव रतन, बलवीर सिंह, मोरपाल, रणसिंह ने बताया कि कटान तेज होने से कई ग्रामीणों के मकानों के कटने का खतरा बना हुआ है। महावीर का मकान कटान में कट जाने के कारण वह ईंटों को उठाकर सुरक्षित स्थान पर रख रहे है। यह स्थिति सिंचाई विभाग के अफसरों की अनदेखी के कारण उत्पन्न हुई है।

क्या कहते  हैं जिम्मेदार
धारा मोड़ने को नाला खुदाई का नया काम नहीं था। यह पुराना काम था। शासन से करीब 12 लाख रुपये जो बजट मिला था। उसको नाला खुदाई में खर्च कर दिया है। पानी और बढ़ने पर नाले मेें पानी जाएगा। अभी रामगंगा का जलस्तर काफी कम है।  सुशील कुमार, एक्सईएन सिंचाई
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ग्रामीणों ने वसूली की शिकायत एसडीएम से की
अमृतपुर। पशुओं को मुफ्त दी जाने वाली दवा ग्रामीणों को रुपये देकर ली जा रही है। यह रुपये मजदूरी खर्चा बताकर पशु विभाग के अधिकारी व कर्मचारी वसूल रहे हैं। बाढ़ प्रभावित गांव अलादपुर भटौली में पशु विभाग की ओर से पशुओं का टीकाकरण नहीं कराया गया। अमृतपुर पशु चिकित्साधिकारी ने पशुओं को लगाने वाले टीके गांव के शिवरतन को थमा दिए और कहा कि वह गांव के पशुओं के टीका लगवा दें। प्रत्येक टीका का पांच रुपये एकत्र कर उनको दिया जाए। गांव में कोई टीका लगाना नहीं जानता है। इस कारण दवा जस की तस ग्रामीण के पास रखी है। ग्रामीणों ने एसडीएम को भेजी शिकायत में आरोप लगाया कि पशु अस्पताल के कर्मचारियों ने पशुओं को दिए जाने वाला मिनकैम मिनरल मिक्चर पाउडर देने पर 30 रुपये व अन्य दवाओं के बदलने 40 से 60 रुपये तक वसूले हैं। अमृतपुर पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जीवन सिंह ने बताया कि कोई अवैध वसूली नहीं हुई है। पांच रुपये प्रति जानवर के हिसाब से मजदूरी ग्रामीणों से ली गई है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. पुष्प कुमार ने बताया कि अवैध वसूली नहीं हो रही है। मजदूरी चार्ज लिया जा रहा है। टीका कारण के लिए जो दवा दी गई है। उसको कोई भी ग्रामीण पशु के लगा सकता है। एसडीएम बसंत कुमार ने बताया कि प्रकरण की जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।

बाढ़ चौकियों पर नहीं पहुंची स्वास्थ्य टीमें
अमृतपुर। गंगा और रामगंगा के जलस्तर में कमी होने के बाद भी दो दर्जन से अधिक गांवों के आवागमन का रास्ता बंद है। गांव कुडरी सारंगपुर, राम प्रसाद नगला, फकरपुर, मंझा की मडैया, जोगराजपुर, उदयपुर, आशा की मढ़ैया, तीसराम की मढैया, हरसिंहपुर कायस्थ, ऊगरपुर समेत अन्य बांवों को जाने का कोई रास्ता नहीं है। अभी भी नाव का सहारा लेकर ग्रामीण आवागमन कर रहे है। गांव में खासी, बुखार व अन्य बीमारियां फैलने से ग्रामीण परेशान है। प्रशासन ने 10 बाढ़ चौकिया बनाई है। जहां स्वास्थ्य विभाग को बैठकर दवा लेने आने वाले ग्रामीणों को दवा मुहैया कराने का आदेश दिया था। लेकिन अभी तक किसी भी बाढ़ चौकी में डाक्टरों की टीम नहीं पहुंची है। एसडीएम वसंत कुमार ने बताया कि डाक्टरों की टीमों को भेजकर दवा दिलाई जाएगी।
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बाढ़ पीड़ितों को बांटा भोजन
अमृतपुर। गांव बमियारी निवासी प्रशांत पाठक शनिवार को एसडीएम वसंत कुमार के गांव जागराजपुर में नाव से पहुंचे। उन्होंने करीब 300 लंच पैकेट बाढ़ पीड़ितों को बांटे। एसडीएम ने बताया कि समाजसेवी बाढ़ पीड़ितों की मदद क्षेत्र में आकर कर सकते हैं।

कटने लगे खेत
शमसाबाद। गंगा के जलस्तर में थोड़ी से गिरावट आने से गांव अचानकपुर में कटान तेज हो गया है। गांव के वागीलाल, नेत्रराम के 10-10 बीघा खेत में गन्ना की फसल खड़ी थी। ग्रामीण गंगा राम, होरीलाल, वेदराम, प्रताप सिंह के खेत खाली पड़े थे। गंगा में आई बाढ़ से इन ग्रामीणों के खेत बाढ़ में कटना शुरू हो गए है। इससे गांव के लोग परेशान हैं।
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