खेल प्रतिभाओं के कम होते जाने के मौजूदा दौर में डेविड बेखम की अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से विदाई एक घटना है। कलात्मक फुटबॉल की कब्रगाह पर यूरोप ने जिस ताकतवर फुटबॉल को वरीयता दी, बेखम उसी के एक प्रतिनिधि थे।
मैदान के ठीक बीच से गोली की तरह निकलते हुए उनके शॉट और फ्री किक पर लहराती हुई शर्तिया गोलपोस्ट में घुसती गेंद बेखम की नैसर्गिक प्रतिभा के सुबूत हैं। 1996 में प्रीमियर लीग के पहले मैच में विंबलडन के खिलाफ मिडफील्ड से गोल कर उन्होंने फुटबॉल प्रेमियों का जो ध्यान खींचा, वह सिलसिला 2002 के विश्व कप में विपक्षी टीम के खिलाफ विजयी गोल दागकर फाइनल में पहुंचने तक और उसके बाद भी जारी रहा।
अपने समय का यह सर्वश्रेष्ठ मिडफील्डर दुनिया के सर्वोत्तम फुटबॉलर के तौर पर बेशक नहीं आंका गया, लेकिन एकाधिक अंतरराष्ट्रीय मैचों में अपनी प्रतिभा के बूते जिस तरह इंग्लैंड को उन्होंने जीत दिलाई, वह एक असाधारण फुटबॉलर से ही संभव था।
अलबत्ता यह भी अजीब है कि दुनिया भर में बेखम की पैरों की कलाकारी की तुलना में उनके फैशन के प्रशंसक अधिक हैं। टैटू, नेल पॉलिश, रंगे हुए बाल और विचित्र पोशाकों से बेखम की जो छवि बनती है, वह उनके फुटबॉलर रूप से भिन्न है। डेविड बेखम पर यह आरोप भी लगे कि उन्हें फुटबॉल से ज्यादा अपनी इमेज की फिक्र है। कुछ आलोचक मानते हैं कि विक्टोरिया जैसे पॉप स्टार से शादी ने उनके खेल करियर को प्रभावित किया।
इसके बावजूद चर्चा और प्रसिद्धि से वंचित इंग्लैंड ने बेखम को राष्ट्रनायक के तौर पर जिस तरह देखा, वह ज्यादा महत्वपूर्ण है। बाद के दिनों में ग्लैमर ने बेखम को फुटबॉल के मैदान में उपलब्धियों से भले ही वंचित कर दिया हो, लेकिन इससे उनकी प्रसिद्धि में कोई कमी नहीं आई। उनके कई समकालीन खिलाड़ी उनसे बेहतर फुटबॉलर थे, लेकिन फिल्मों से लेकर फैशन तक बेखम के जादू के आगे सब फीके रहे।
अमेरिका में फुटबॉल को लोकप्रिय बनाने और इंग्लैंड में ओलंपिक का आयोजन कराने में बेखम की भूमिका किसी और से अधिक थी। बेखम ने अपने लिए जो जीवन चुना, उसमें उनके संन्यास का हालांकि बहुत अर्थ नहीं है। इसीलिए अपने बूट टांग देने का फैसला करने के बावजूद यह सदाबहार फुटबॉलर टीवी स्क्रीन पर, पत्रिकाओं के कवर पेज पर और विज्ञापनों के होर्डिगों में पहले की तरह ही नजर आता रहेगा।