गुरुकुल झज्जर में स्वामी ओमानंद सरस्वती संग्राहलय बनने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है। इसके लिए चंडीगढ में बृहस्पतिवार को सरकार और गुरुकुल के प्रतिनिधियों के मध्य बातचीत के बाद इसे मंजूरी प्रदान की गई है। गुरुकुल का यह संग्रहालय भी ऐतिहासिक होगा जो पांच एकड़ भूमि में बनाया जाएगा। एक वर्ष की अवधि में तैयार होने वाले इस संग्राहलय में रखे सामान की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की होगी जबकि इसके भवन के लिए भूमि गुरू कुल उपलब्ध कराएगा।
लंबे समय से गुरुकुल में संग्राहलय बनाने की मांग अब पूरी तरह से मंजूर हो गई है। पुरातत्व विभाग की ओर से पिछले दिनों विभाग के आला अधिकारियों ने यहां दौरा किया था। जबकि गुरुकुल झज्जर ने सरकार से यहां पहले भी संग्राहलय बनवाने की मांग की थी। तब सीएम ने इसे रोहतक में बनवाने का विचार दिया था। मगर गुरुकुल से जुड़े प्रतिनिधियों ने इसे झज्जर में बनवाने की बात रखी थी। अब इस बीच वीरवार को गुरुकुल झज्जर के कुलपति डॉ. योगानंद शास्त्री, आचार्य विजयपाल, आचार्य विरजानंद तथा राजबीर सिंह आज मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के अलावा विभाग की मंत्री गीता भुक्कल तथा अन्य अधिकारियों के साथ बैठक हुई। बैठक में तय हुआ कि गुरुकुल झज्जर के लिए पांच एकड़ भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। इस पर भवन बनाने की जिम्मेदारी सरकार की होगी। सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सरकार की रहेगी। भव्य संग्राहलय में वह सारा ऐतिहासिक सामान रखा जाएगा।
गुरुकुल में हैं अति दुर्लभ सामान
झज्जर के इस ऐतिहासिक गुरुकुल में अति दुर्लभ सामग्री है। प्राचीनकाल के राजे-महाराजाओं के समय सिक्के, प्राचीन अस्त्र-शस्त्र, मोहनबाड़ी की खुदाई में मिले अनेक भांड, बर्तन, हिलने वाला पत्थर सहित अन्य दुर्लभ एवं महत्वपूर्ण वस्तुएं भी हैं। इन सब वस्तुओं के लिए आधुनिक एवं भव्य संग्राहलय बनेगा।
स्वामी ओमानंद सरस्वती के नाम से भव्य संग्राहलय बनाये जाने को सरकार ने मंजूरी दे दी है। यह पांच एकड़ में बनेगा। इसके लिए सरकार का धन्यवाद करते हूं, झज्जर-रेवाड़ी मार्ग पर इस संग्राहलय के लिए गुरुकुल पंाच एकड़ भूमि देगा। जबकि सरकार यहां भव्य भवन बनाएगी।
- विजयपाल, आचार्य, गुरुकुल