इराक के अल अंबार प्रांत के फालुजा शहर में इराकी सेना को जबर्दस्त मात मिली है, और इस प्रमुख कूटनीतिक शहर पर अल कायदा से जुड़े आतंकवादियों ने कब्जा जमा लिया है। यह लड़ाई उस वक्त भड़की, जब सुरक्षाकर्मियों ने रमादी में सुन्नी अरबों के एक कैंप को उखाड़ दिया था। प्रतिक्रियास्वरूप सुन्नियों ने विरोध शुरू किया, जिसमें इराकी सेना और इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक जैसे अल कायदा संबद्ध उग्रवादी संगठन आमने-सामने आ गए। इस संघर्ष में दर्जनों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
हालांकि फालुजा वर्ष 2010 में भी चर्चा में रहा था, क्योंकि तब एक अध्ययन में यह दावा किया गया था कि वहां 2004 के बाद से कैंसर के मरीजों की संख्या में चार गुना और 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में कैंसर के मामलों में 12 गुना की वृद्धि हुई है। शोधार्थियों का मानना था कि यह ठीक उसी प्रकार का कैंसर है, जो हिरोशिमा परमाणु बम हमले में बचे लोगों को बाद में रेडिएशन की वजह से हुआ था।
राजधानी बगदाद से करीब 69 किलोमीटर पश्चिम स्थित फालुजा एक ऐतिहासिक शहर है और बेबीलोन काल में भी इसका अस्तित्व रहा है। हालांकि आधुनिक समय में सद्दाम हुसैन का कार्यकाल इसका स्वर्णिम काल था, और उस दौरान सुन्नी बहुल इस शहर में तीव्र औद्योगिकीकरण हुआ। ऐसा माना जाता है कि इसका नाम फालुथा से आया है, जिसका अर्थ होता है, नहर नियामक। असल में, मेसोपोटामिया की सभ्यता के विकास में सहायक यूफ्रेटस नदी यहीं कई नहरों में बंट जाती थी।
हालांकि यहां की आबादी बमुश्किल साढ़े तीन लाख है, लेकिन इराक में इसकी गिनती 'मस्जिदों के शहर' के रूप में भी होती है, क्योंकि यहां और आसपास के गांवों में 200 से ज्यादा मस्जिदें हैं।