क्या सच में फ़ेसबुक की नज़र में वॉट्सऐप की कीमत 19 अरब डॉलर या लगभग 1180 अरब रुपए है?
आखिरकार, ये रकम रिटेल कारोबार से जुड़ी इंग्लैंड की कंपनी नेक्स्ट, प्रकाशन कारोबार से जुड़ी पियरसन या टेलीविजन व्यवसाय से जुड़ी आईटीवी की मौजूदा कीमत से अधिक है। तेजी से बढ़ रहे मैसेजिंग ऐप के मुक़ाबले ये कंपनियां अच्छा ख़ासा मुनाफ़ा कमा रही हैं।
मैंने इस समझौते को सही ठहराने के लिए दिए जा रहे सभी अनुमानों पर गौर किया। मोशी मांस्टर के माइकल स्मिथ ने ट्वीट किया: "मैसेजिंग ऐप उस सूरत में काफी मूल्यवान है जब गेम, कॉमर्स, समाचार जैसी सामग्री को ऊपर रखा जाए। लाइन और वीचैट पर गौर कीजिए।"
मेरे एक हमउम्र दोस्त ने मुझे मैसेज भेजा: "हालांकि हम ट्विटर पर हैं, लेकिन इसके दोगुने लोग वॉट्सऐप पर हैं, जिसे आप और मैं शायद कभी भी इस्तेमाल नहीं करेंगे क्योंकि हमारी उम्र अधिक है।"
ऑडियंस की कीमत
तो बात ये है कि फ़ेसबुक ने एक विशाल युवा और अंतरराष्ट्रीय ऑडियंस की आर्थिक कीमत का आकलन किया है। यह आकलन इस शर्त के बावजूद है कि वे वॉट्सऐप के संस्थापक की इस इच्छा का सम्मान करेंगे कि सेवाओं को सरल और विज्ञापनों से मुक्त बनाए रखा जाए।
दूसरे सभी अनुमान करीब 45 करोड़ यूजर्स से मिलने वाले डाटा को लेकर हैं। एक व्यक्ति ने कहा, "मुझे संदेह है कि उन्होंने बड़ी संख्या में फोन नंबरों के लिए 16 अरब डॉलर का भुगतान किया है।"
सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव
इस दलील से लगता है कि वाट्सएप के यूजर्स से मिली जानकारी का इस्तेमाल फ़ेसबुक के विज्ञापन कारोबार को बढ़ाने के लिए किया जाएगा।
कुछ दूसरे लोगों का कहना है कि इस सौदे का बड़ा हिस्सा शेयर के रूप में है, ऐसे में जब तक फ़ेसबुक के शेयरों की कीमत बढ़ती रहती है, तब तक सौदे की रकम से बहुत अधिक फर्क नहीं पड़ता है।
गिनती के कर्मचारी
इस मसले पर सबसे अधिक प्रमाणिक टिप्पणी वेंचर कैपिटल फर्म सिकोइया कैपिटल के जिम गोट्ज से मिली। उन्होंने हमें चार आंकड़े दिए, जो पूरी कहानी को बयां करते हैं। पहला, 45 करोड़ सक्रिय यूजर्स- ये वो आंकड़ा है जिस तक इतनी तेजी से आज तक कोई कंपनी नहीं पहुंची। दूसरा, इंजीनियरों की संख्या 32 है- यानी कर्मचारी बहुत ही कम हैं। तीसरे और चौथे आंकड़े संस्थापक की डेस्क पर लिखे मिल जाएंगे- "कोई विज्ञापन नहीं! कोई गेम नहीं! कोई चालबाजी नहीं!। मार्केटिंग पर जीरो डॉलर का खर्च।"
ये एक ऐसी कंपनी है जिसका प्रचार सिर्फ मुंह ज़बानी हुआ है।
सिकोइया कैपिटल ने वॉट्सऐप के एकदम शुरुआती दिनों में इसमें निवेश किया था। जिम गोट्स इस सौदे को सिकोइया के लिए "खट्टामीठा" बताते हैं। हालांकि इतनी अधिक रकम मिलने की खुशी तो उन्हें है ही।
नया चलन
लेकिन किसी ने भी इस सौदे के पीछे छिपी गणित को नहीं समझा कि दस अरब डॉलर या शायद 40 अरब डॉलर की जगह आखिर 19 अरब डॉलर में ही ये सौदा क्यों हुआ। इस रकम में तीन अरब डॉलर की राशि शामिल है जो आगे चलकर इसके कर्मचारियों को मिलेगी।
एक व्यक्ति ने मुझे मैसेज भेजा कि इस तरह के सौदों में प्रति व्यक्ति 40 डॉलर एक स्टैंडर्ड रेट है- लेकिन सिर्फ इतने से, सौदे की रकम को कैसे समझा जा सकता है?
सोशल मीडिया फेसबुक
एक परंपरागत अधिग्रहण में किसी कंपनी को अपने निवेशकों को यह समझाना पड़ता है कि इस सौदे से भविष्य में होने वाली आमदनी कैसे प्रभावित होगी। लेकिन इन दिनों ये बात क्लिक करें फ़ेसबुक या गूगल जैसी कंपनियों पर लागू होती नहीं दिखाई देती है।
कुछ लोगों को ये बातें नुक्ताचीनी निकालने जैसी लग सकती हैं। आखिरकार जब फ़ेसबुक ने इंस्टाग्राम के लिए एक अरब डॉलर का भुगतान किया तो सभी हंसे थे और अब माना जाता है कि वो एक समझदारी भरा फैसला था।
हकीकत
अंत में, सीधी बात ये है कि ये सौदा इसलिए हुआ क्योंकि फ़ेसबुक ये सौदा कर सकता था। इसकी एक वजह ये भी हो सकती है कि कंपनी चाहती हो कि तेजी से बढ़ती सोशल मैसेजिंग इंडस्ट्री में किसी और का दबदबा न बने।
लेकिन इन चर्चाओं को सुनते हुए मेरी उम्र काफी अधिक हो गई है कि विशाल इंटरनेट ऑडियंस की कीमत क्या है और आखिरकार आमदनी को लेकर बहुत अधिक चिंता करना मूर्खतापूर्ण क्यों है? ऐसे ही अनुमान 1999 में जताए गए थे, और वो उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे।