पश्चिम जिले की स्पेशल स्टाफ टीम ने सरकारी नौकरी का झांसा देकर युवक की हत्या करने वाले आरोपी को मुंबई से गिरफ्तार किया है। पुलिस ने द्वारका से युवक का कंकाल बरामद कर लिया है। फर्जीवाडे का भेद खुलने पर आरोपी ने हत्या कर शव को जंगल में दफना दिया और परिवार सहित मुंबई भाग गया था। वारदात के तीन माह बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त रणवीर सिंह ने बताया कि भिवानी के मलकोस गांव निवासी जय भगवान (47) ने 12 मार्च को उत्तम नगर थाने में 20 वर्षीय बेटे विकास के अगवा होने की शिकायत दर्ज कराई थी। जय भगवान ने शिकायत में बताया कि उसके गांव के रहने वाले सतीश ने विकास को सरकारी नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया था। इसके एवज में सतीश ने उनसे तीन लाख रुपये भी लिए थे।
सतीश के कहने पर वह बेटे को लेकर 10 मार्च को दिल्ली आए। यहां वे सतीश के उत्तम नगर स्थित किराए के मकान पर उससे मिले, जहां उसने विकास को दो अन्य लोगों के साथ ट्रेनिंग पर भेजने का आश्वासन दिया। इसके बाद वो विकास को छोड़कर गांव चले गए। उसी दिन उनके पास विकास ने फोन कर बताया कि सतीश ने उसे जबरदस्ती दवा खिला दी है।
जब उन्होंने सतीश से बात की तो उसने 10-12 दिन तक कोई संपर्क नहीं करने के लिए कहा। अगले दिन विकास और सतीश का फोन स्विच ऑफ मिला। 12 मार्च को जब वो सतीश के घर पहुंचे तो वहां ताला लगा हुआ था। इस पर पुलिस ने तफ्तीश के बाद सतीश को मुंबई के कल्याण से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल कार, लैपटॉप और 20 हजार रुपये बरामद किए हैं।
कंकाल का कराया जाएगा डीएनए टेस्ट
सतीश की निशानदेही पर पुलिस ने द्वारका के जंगल से कंकाल बरामद कर लिया है। माना जा रहा है कि यह विकास का ही कंकाल है। हालांकि, इसका डीएनए टेस्ट करवाएगी, जिससे यह बात पुख्ता हो जाए।
शक होने पर हुई थी कहासुनी
आरोपी को शक था कि विकास गांव में उसके फर्जीवाड़े का खुलासा कर सकता है, इसलिए वह उसे नींद की गोली खिलाकर परिवार समेत फरार होना चाहता था। मेडिकल टेस्ट के बहाने जब सतीश ने उसे नींद की गोली खिलाई तो विकास ने गांव में फोन कर इस दवा के बारे में पूछताछ की। नींद की गोली खिलाए जाने की बात पता चलते ही विकास भड़क गया और सतीश से झगड़ा करने लगा। इस दौरान सतीश ने विकास की गला घोंटकर हत्या कर दी।
नौकरी दिलाने के नाम पर कई लोगों को ठगा
सतीश ने दिल्ली के टैगोर गार्डन में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने के बाद नजफगढ़ में ढाई साल तक इंश्योरेंस एजेंट के तौर पर काम किया। उसके बाद वह नौकरी छोड़ कर गांव चला गया और लोगों को दिल्ली में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों की ठगी करने लगा। अभी तक की जांच में छह लोगों के साथ ठगी की बात सामने आई है।