बसों के इंतजार में पहले गांव के चौराहों में लड़कों के कमेंट्स सुनने पड़ते हैं। बसों में चढ़ने पर किसी न किसी बहाने लड़के कभी हाथ पकड़ते हैं तो कभी अश्लील हरकतें करते हैं।
फिर कॉलेज में पहुंचने पर गेट के पास ग्रुप में लड़के पीछा करने लगते हैं। छुट्टी के बाद कॉलेज से निकलने में डर लगता है। वही लड़के फिर से बसों में चढ़ जाते हैं और हर एक सीट पर एक लड़का बैठ जाता है।
कंडक्टर भी खड़े होकर देखते रहते हैं। कभी-कभी तो हद हो जाती है कि हमें कागजों की चिट फेंककर नंबर दिया जाता है और उनमें अश्लील बातें लिखी होती है। डर लगता है कि न जाने कब ये मनचले किस तरह की हरकत कर बैठें।
घर पहुंचते ही कमरे के एक कोने में हम अपने दर्द को आंसूओं में बहा लेती हूं। एक पल लगता है कि पिताजी को सब कुछ बता दूं, फिर डरती हूं अगर परिजनों को पता चल गया तो कहीं कॉलेज जाना भी न बंद करा दें।
कुछ ऐसा ही मनचलों की हरकतों से छात्राओं का दर्द देखने को मिला मंगलवार को राजकीय कन्या महाविद्यालय में।
जागरूकता कार्यक्रम के तहत छात्राओं ने थोड़ी हिम्मत दिखाते हुए आईजी रेंज अनिल राव के सामने अपना दर्द बयां। एक बार तो खुद आईजी रेंज छात्राओं की इस व्यथा को सुनकर खामोश हो गए। बाद में उन्होंने छात्राओं को मनचलों की हरकतों पर लगाम लगाने का आश्वासन दिया। इस दौरान डीआईजी एवं एसपी सौरभ सिंह, कॉलेज की प्राचार्य लक्ष्मी बेनीवाल दलाल और डीएसपी अनिल कुमार भी मौजूद थे।
भालौट रूट में फब्तियां कसते हैं लड़के
भालौट रूट पर आने वाली दो छात्राओं ने बताया कि लड़के बसों व आटो में भीड़ का फायदा उठाकर छूने का प्रयास करते हैं। दोस्तों को मोहरा बनाकर उन पर फब्तियां कसते हैं। यदि उन्हें हरकत से टोक दिया जाए तो वे न केवल झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं बल्कि अगले दिन से और ज्यादा हरकतें करना शुरू कर देते हैं।
वहीं आईजी रेंज से आपबीती सुनाते हुए चरखी दादरी से आने वाली छात्रा ने बताया कि उनके रूट पर सबसे ज्यादा समस्या है। बोंद गांव के 10-15 युवकों का ग्रुप है।
वह ग्रुप जिस भी बस में चढ़ जाए समझ लो उस बस में युवतियों की हालत खराब हो जाती है। वह सारा ग्रुप कलानौर में उतर जाता है और फिर वापस बस में चढ़ जाता है। लड़कियों से छेड़छाड़ करना, कमेंटबाजी कर वह हमें परेशान करते हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई कोई नहीं करता।
हाथ तक पकड़ लेते हैं वह लोग
छात्राओं ने शिकायत करते हुए बताया कि कोई उनके खिलाफ बोलने को तैयार नहीं होता है। दूसरे यात्री सहित कंडक्टर चुपचाप तमाशा देखते रहते हैं। किलोई रूट से आने वाली एक छात्रा ने बताया कि एक तो लड़के दरवाजों पर खड़े हो जाते हैं। लड़कियों को चढ़ने नहीं देते। यदि किसी तरह चढ़ जाए तो छोटे कागजों व पर्चियों पर नंबर डालकर हमारी ओर फेंकते हैं। पहरावर रूट से आने वाली छात्राओं ने बताया कि हमारे रूट पर लड़कियों के साथ लड़के छेड़खानी के साथ-साथ झगड़ा करने पर उतारू रहते हैं। अगर हम थोड़ी हिम्मत कर बहस कतरे हैं तो वह हाथ पकड़ लेते हैं। बस चुपचाप किसी तरह से छुड़ाकर रोते हुए घर आना पड़ता है। गोहाना की ओर से आने वाली छात्राओं का कहना है कि वे बसों व जीपों में तो छेड़छाड़ का शिकार होती ही हैं साथ ही जब वे न्यू बस स्टैंड से गलियों में होते हुए कॉलेज तक आती है तो लड़कों का ग्रुप उनके पीछा करना शुरू हो जाता है। पीछे चलते हुए लड़के कमेंट करते रहते हैं। इसी प्रकार दो छात्राओं ने कहा कि वे भी बसों में सफर करती हैं। कई बार हालात ये होते हैं कि बस पास धारकों को सीट नंबर अलाट हो जाते हैं। लड़के सारी सीटों पर कब्जा कर लेते हैं और बस कंडक्टर की भी उन्हें कुछ कहने की हिम्मत नहीं होती है।