हाउसिंग बोर्ड स्थित ईएसआई डिस्पेंसरी को बिना सुविधा बढ़ाए ही अपग्रेड कर दिया गया है।
डिस्पेंसरी से मॉडल डिस्पेंसरी कम डायग्नोस्टिक सेंटर तो बना दिया, लेकिन यहां अल्ट्रासाउंड मशीन तक नहीं है। ऐसे में रोजाना 15 से 20 मरीजों को सिविल अस्पताल या पीजीआई रेफर करना पड़ रहा है। अल्ट्रासाउंड मशीन की कीमत 3 से 13 लाख है।
जिले में ईएसआई के अंतर्गत आने वाले बीमा धारकों की संख्या 10 हजार है।
इन 10 हजार लोगों के साथ उनके हजारों परिजन भी ईएसआई से जुड़े हैं। यहां स्थित ईएसआई डिस्पेंसरी में रोजाना 100 से अधिक मरीज पहुंचते हैं।
अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं होने के कारण पीजीआई और सिविल अस्पताल रेफर किए जाने वाले 15-20 मरीजों में से अधिकांश महिलाएं और पेट संबंधी समस्याओं से पीड़ित मरीज होते हैं। यहां एक महिला चिकित्सक के पास अल्ट्रासाउंड जांच करने का अनुभव भी है, लेकिन बिना मशीन इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। डिस्पेंसरी अपग्रेड होने के बाद यहां 4 एमओ, 5 से 6 फार्मासिस्ट, 2 एएनएम कुल 22 से 24 कर्मचारियों का स्टाफ है।
बोले अधिकारी
हमारे यहां एक महिला चिकित्सक को अल्ट्रासाउंड जांच करने का अनुभव है। उन्होंने अभी पीजीआई के रेडियोलॉजी विभाग से कोर्स पूरा किया है। मॉडल डिस्पेंसरी कम डायग्नोस्टिक सेंटर में एक अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध कराने के लिए कॉर्पोरेशन को पत्र लिख दिया गया है। संभव है कि नए सत्र के बजट में यह मशीन आ जाए और मरीजों की अल्ट्रासाउंड जांच यही होने लगे।
- डॉ. भामिक कादियान, प्रभारी, एमओ, मॉडल डिस्पेंसरी कम डायग्नोस्टिक सेंटर, ईएसआई रोहतक।
- अल्ट्रासाउंड जांच की व्यवस्था
अस्पताल : मरीजों की संख्या मशीन
सामान्य अस्पताल में प्रतिदिन : 50 से 60 एक
पीजीआईएमएस में प्रतिदिन : 200 के करीब दो