एमडीयू के कर्मियों और शिक्षकों के लिए राहत की खबर है।
लंबे समय से विभागीय प्रमोशन की मांग कर रहे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों केप्रमोशन संबंधित प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई है।
जूनियर लाइब्रेरी असिस्टेंट और सीनियर लाइब्रेरी असिस्टेंट को भी प्रमोशन मिलेगा। सोमवार को विवि में हुई ईसी (एग्जीक्यूटिव काउंसिल) की बैठक में यह फैसला लिया गया।
टीसर्च वेलफेयर फंड को भी फिर से शुरू किया जाएगा। बैठक में 90 से ज्यादा प्रस्ताव रखे गए। एसी की बैठक में पास हुए सभी मुद्दों पर ईसी में भी रजामंदी दे दी गई। हालांकि एक टेबल एजेंडा भी रखा गया, जिस पर कोई चर्चा नहीं हो सकी।
विवादित मामले पर नहीं हो सका फैसला
दो बजे शुरू हुई ईसी की बैठक में प्रस्ताव रखा गया कि अब राजनीति विज्ञान के शिक्षक लोक प्रशासन और लोक प्रशासन के शिक्षक राजनीति विज्ञान में पढ़ाने के लिए योग्य माने जाएंगे। यह प्रस्ताव अब तक विवादित रहा है। इससे पहले तीन बार यह प्रस्ताव एसी की बैठक में रखा जा चुका है। ईसी की बैठक में भी यह पहले दो बार टेबल आइटम के तौर पर रखा गया, लेकिन यहां भी इसे नकार दिया गया। सोमवार को फिर ईसी की बैठक में यह मुद्दा रखा गया, लेकिन एक बार फिर इसे पास नहीं किया जा सका। निर्णय लिया गया है कि प्रस्ताव को यूजीसी में भेजा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद इसे नए सिरे से एसी की बैठक में रखा जाएगा।
आरोपों की होगी जांच
बैठक में एक प्रस्ताव डीडीई निदेशक और एजुकेशन के कोआर्डिनेटर के बीच विवाद का भी रखा गया था। सूत्र ने बताया कि डीडीई निदेशक ने एजुकेशन के कोआर्डिनेटर पर कई आरोप लगाए थे। इसकी लिखित शिकायत भी की गई थी। फैसला लिया गया है कि इन आरोपों की जांच के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। समिति की रिपोर्ट को ईसी की अगली बैठक में रखा जाएगा।
मृतक के आश्रित रिटायरमेंट उम्र तक रहेंगे आवास में
फैसला लिया गया कि यदि किसी शिक्षक, अधिकारी या गैर शिक्षक कर्मचारी की मृत्यु रिटायर होने से पहले हो जाती है तो उसके विधिवत आश्रितों से उक्त कर्मी की सेवानिवृत्ति की उम्र होने तक यूनिवर्सिटी आवास खाली नहीं कराया जाएगा।
ये प्रस्ताव भी हुए पास
एसी में पास हुई नए कोर्स की योजनाओं को मंजूरी मिल गई है। शारीरिक शिक्षा विभाग में पीजी डिप्लोमा इन योगा साइंस एमए एप्लायड साइकोलॉजी एंड पीजी डिप्लोमा इन ह्यूमन रिसोर्स एंड स्कूल साइकोलॉजी के प्रस्ताव पर भी सहमति बन गई है। यूनिवर्सिटी के लॉ डिपार्टमेंट में और गुड़गांव में एलएलएम दो वर्षीय पाठ्यक्रम शुरू करने के प्रस्ताव पर भी कोई असहमति नहीं जताई गई। स्नातक स्तर पर किए गए बदलाव भी मान लिए गए हैं।