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चुनावी रण में संतान बनी सारथी

Fri, 10 Oct 2014 02:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ रोहतक
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चुनाव पूरे रंग में है। रण में चक्रव्यूह तोड़ने के लिए प्रत्याशियों के साथ उनके बच्चे भी उतर आए हैं।
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महारथियों की संतानें सारथी की तरह पूरी कमान संभाल रही हैं।

मम्मी-पापा को विधायक बनाने के लिए सियासी मोर्चे पर डटे बेटे जॉब, बिजनेस और पढ़ाई छोड़कर 12-12 घंटे तक जनसभाएं, जलसे, टी-पार्टी और डोर टू डोर जनसंपर्क कर रहे हैं।

थकान नहीं, सिर्फ जुनून है, अपनों को जिताने का। उनके स्कूल, कॉलेज और ऑफिस के दोस्त भी दिल्ली व चंडीगढ़ से आकर पूरा साथ दे रहे हैं। जानिए सियासी घरानों की कहानी...
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मीडिया संभाल रहे हिमांशु
रोहतक से भाजपा प्रत्याशी मनीष ग्रोवर के बेटे हिमांशु ग्रोवर बताते हैं कि पिताजी और मैं अलग-अलग जनसंपर्क कर रहे हैं। अगर वे कहीं नहीं जा पाते तो मैं जाता हूं। रोजाना सुबह व शाम 6 से 7 घंटे तक प्रचार के बाद विज्ञापन व मीडिया संभालता हूं। बीटेक के बाद पिताजी के बिजनेस में हाथ बंटा रहा हूं। स्कूल व कॉलेज के दोस्तों का पूरा साथ मिल रहा है। बहन रश्मी आहूजा दिल्ली में हैं, लेकिन चुनाव में वे भी घर आई हैं।
तीनों उतरे रण में
हलका गढ़ी-सांपला-किलोई से इनेलो प्रत्याशी सतीश नांदल के तीनों बेटे सुमित, संचित और निशांत रण में उतर आए हैं। सुमित बीटेक करने के बाद दिल्ली मे जॉब के बाद अब पिताजी का बिजनेस संभालता है।

संचित अंबाला से बीटेक फाइनल ईयर की पढ़ाई कर रहा है। अब प्रचार की इंजीनियरिंग संभाल रहे हैं। तीनों सुबह 7:30 से रात 9 बजे तक जनसंपर्क करते हैं। दोस्त आ जा रहे हैं। रोजाना ड्यूटी बदलती है। कभी सुमित मां तो कभी संचित व निशांत पिता के साथ प्रचार के लिए जाते हैं।
छुट्टियां लेकर 14 घंटे प्रचार
रोहतक से इनेलो प्रत्याशी राजकुमार शर्मा के बेटे छुट्टी लेकर प्रचार में उतर आए हैं। बड़ा बेटा नितिन राज अमेरिका में जॉब करता है, जल्द आने वाला है।

दूसरे बेटे करण राज व शेखर राज ने छुट्टी ली है। 14 घंटे प्रचार के साथ पार्टी ऑफिस, मीडिया व विज्ञापन का काम संभाल रहे हैं। करण एलपीएस बोसार्ड में मार्केटिंग व एक्सपोर्ट विभाग के हेड हैं तो राज स्टेट काउंसिल सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट। करण बताते हैं कि उन्होंने नामांकन के बाद ही छुट्टियां ले ली थी। शेखर भी छुट्टी लेकर डटे हैं। करण पिताजी के साथ सुबह 6 बजे ही मीटिंग के लिए निकल जाते हैं तो शेखर ऑफिस व मीडिया संभाल रहे हैं। दोनों के स्कूली दोस्त भी साथ दे रहे हैं।
बेटे मैदान में तो बेटी फोन पर मांग रही सहयोग
महम से भाजपा प्रत्याशी शमशेर खरकड़ा के बेटे तकदीर खरकड़ा बताते हैं कि उन्होंने एमबीए की पढ़ाई पूरी करते ही 25 की उम्र में पिताजी का काम समझना शुरू कर दिया। पांच साल से प्रचार की कामन संभाल रखी है। 16 से 17 घंटे प्रचार कर रहा हूं। छोटा भाई दक्षवीर भी पूरा साथ दे रहा है। बहन सोनाली एमबीए की पढ़ाई कर रही है, लेकिन घर बैठे अपनी सहेलियों से फोन पर पिताजी को सहयोग की अपील करती हैं।
15 साल से पिताजी के साथ
महम से कांग्रेस प्रत्याशी आनंद सिंह दांगी के बेटे बलराम दांगी बताते हैं कि वे 15 साल से सियासी रण में पिताजी के साथ हैं। बीए करने के बाद काम संभालते हुए जिला परिषद का वाइस चेयरमैन भी बना। सुबह 6 से आधी रात तक बस प्रचार। बहन आरती और गीता अपना घर संभाल रही हैं। बलराम सोशल मीडिया, विज्ञापन व पार्टी कार्यालय भी देख रहे हैं।  
छोटी उम्र में बड़ी जिम्मेदारी
कलानौर से कांग्रेस प्रत्याशी शकुंतला खटक के बेटे विशाल और अंकुर दावा करते हैं कि मम्मी को जिताकर ही रहेंगे। दोनों ही छोटी उम्र में बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। करनाल से एमपीएचडब्ल्यू कर रहा 19 वर्षीय विशाल और चंडीगढ़ से स्नातक कर रहा 18 वर्षीय अंकुर सुबह 5 बजे ही दोस्तों के साथ प्रचार पर निकल जाते हैं। 12 घंटे गांव-गांव, कॉलोनी-कॉलोनी घूम रहे हैं। बहन अंकुश दिल्ली में सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रही है। वह प्रचार से दूर है।
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वकालत के साथ सियासत भी
रोहतक से कांग्रेस प्रत्याशी बी. बी. बतरा के बेटे 32 वर्षीय सिद्धार्थ बतरा 10 साल से वकालत कर रहे हैं। 20 दिनों से पिता के साथ सियासी मैदान में भी 14 घंटे लगा रहे हैं। बताते हैं कि रात 10-11 बजे ही फुर्सत मिलती है। पूरा दिन चाय पीकर ही गुजर जाता है। एमडीयू से एलएलबी के बाद सुप्रीम कोर्ट में वकालत करते हैं। कोर्ट से छुट्टियां ली हैं। चंडीगढ़ और दिल्ली के दोस्त भी साथ हैं।
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