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अवैध गर्भपात करती बीएएमएस डॉक्टर और नर्स गिरफ्तार

Wed, 10 Sep 2014 02:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ रोहतक
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स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सूचना के आधार पर मंगलवार को सांपला के अमर अस्पताल में छापेमारी की।
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इस दौरान एक बीएएमएस डॉक्टर और नर्स को एक महिला का गर्भपात करते हुए पकड़ लिया। विभाग के अफसरों ने विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करते हुए आरोपियों को पुलिस के हवाले कर दिया और गर्भपात करने से संबंधित चीजों को सील कर दिया।

लाइसेंस नहीं मिलने पर टीम ने अस्पताल का ड्रग स्टोर भी सील कर दिया। टीम का नेतृत्व डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. कुलदीप ने किया था।

डॉ. कुलदीप ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि सांपला के अमर अस्पताल में अवैध रूप से गर्भपात कराया जा रहा है। इसके बाद वहां छापेमारी की। निजी अस्पताल में एक महिला बीएएमएस डॉक्टर नमिता और नर्स एवं अस्पताल संचालक की पत्नी कविता मौके पर गांधरा निवासी एक महिला का गर्भपात कर रही थीं।
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टीम ने गर्भपात करने वाला समान सील कर डॉक्टर एवं नर्स को पुलिस के हवाले कर दिया। वहीं, कार्रवाई के दौरान अस्पताल संचालक यशवीर सिंह तोमर मौके से फरार हो गया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर डॉक्टर और नर्स को हिरासत में ले लिया है और अस्पताल संचालक की तलाश जारी है।

जांच टीम में कलानौर की एसएमओ डॉ. कमलेश वर्मा, ड्रग कंट्रोलिंग ऑफिसर डॉ. मनमोहन मोर, एमओ सांपला डॉ. सतीश, एमओ डॉ. विशाल, एमओ डॉ. संदीप शामिल रहे।
 
80 प्रतिशत डिलीवरी सर्जरी से
टीम ने अस्पताल के रिकॉर्ड भी जांचे। इसमें सामने आया कि यहां 80 प्रतिशत डिलीवरी सर्जरी से की गई है। जबकि सर्जरी के लिए सर्जन, एनेस्थेटिक, एमबीबीएस डॉक्टर का होना आवश्यक है। टीम के सदस्य भी इतनी तादाद में सर्जरी होने से हैरान है। टीम ने आशंका जताई है कि कहीं बिना विशेषज्ञ के यह सर्जरी तो नहीं की गई। इसकी जांच होगी।

बोले अधिकारी
गर्भपात कराने आई महिला के तीन बच्चे हैं। वह करीब ढाई-तीन माह के गर्भ से थी। जांच में गर्भपात किया जाना पाया गया है, न कि लिंग जांच की। इसलिए गर्भपात कराने आई महिला पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। वहीं, बीएएमएस चिकित्सक, नर्स एवं अस्पताल संचालक पर बिना अनुमति के गर्भपात करने के आरोप में कार्रवाई की गई है।
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- डॉ. कुलदीप, डिप्टी सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग

यह हैं नियम और व्यवस्था
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. कुलदीप ने बताया कि परेशानी होने पर गर्भपात करने की अनुमति केवल एमबीबीएस डॉक्टर और गायनेकोलॉजिस्ट को है। गर्भपात करने के लिए डॉक्टर को विशेष प्रशिक्षण लेना होता है। संबंधित डॉक्टर जिले के सिविल सर्जन कार्यालय से पंजीकृत भी होता है। यदि ऐसा नहीं है तो गर्भपात करने वाले डॉक्टर, स्टाफ, अस्पताल पर अवैध गर्भपात, हत्या और भ्रूण हत्या करने का केस दर्ज होता है। जिले में गर्भवती महिलाओं को ज्यादा परेशानी होने पर उनका गर्भपात करने की अनुमति सिर्फ 25 निजी अस्पतालों को है। 2014 में अवैध गर्भपात करने का यह पांचवां मामला सामने आया है। सभी पर कार्रवाई की गई है। मामले कोर्ट में चल रहे हैं। इसमें दो से सात साल कारावास और पांच हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। 
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