विकास नगर की एक तीन साल की बच्ची गर्म पानी गिरने से झूलस गई। परिजन उसे तुरंत उपचार के लिए इमरजेंसी लेकर पहुंचे। मगर यहां मौजूद चिकित्सकों ने परिजनों को एक पर्ची पर जले पर लगाने की ट्यूब लिखकर बाहर से लाने के लिए कहा।
परिजन तुरंत बाहर से दवा खरीदकर लाए और बच्ची को दवा लगाई गई। ऐसा सिर्फ इस बच्ची के साथ नहीं हुआ बल्कि सामान्य अस्पताल में जलने से आने वाले प्रत्येक मरीज के परिजन को यूं ही बाहर से जले पर लगाई जाने वाली ट्यूब लेकर आनी पड़ती है। इमरजेंसी में जले पर लगाने की ट्यूब तक नहीं है।
इसके अलावा अनेक महत्वपूर्ण दवाइयां खत्म हैं। अस्पताल प्रशासन ने खत्म दवाइयों की लिस्ट चस्पाकर अपने काम की इतिश्री कर दी है।
अक्सर दवाइयों की रहती है कमी
इमरजेंसी को सामान्य अस्पताल का सबसे अहम पार्ट माना जाता है। भिवानी के सामान्य अस्पताल की इमरजेंसी में हर रोज करीब दो सौ से ढाई सौ तक की ओपीडी रहती है। मगर अक्सर इमरजेंसी में अनेक महत्वपूर्ण दवाइयां खत्म रहती है। फिलहाल भी इमरजेंसी में जले पर लगाई जाने वाली ट्यूब के अलावा बीपी, हार्ट, नींद समेत अनेक दवाइयां खत्म है। जिनमें मोनटेयर, क्लॉपीड्रोजेल आदि गोलियों के अलावा एनालिप्रील, एमवीआई, फोर्टविन, एनजीटी, एचसी, ओक्ट्रोटाइड, एमिनोड्रोन आदि इंजेक्शन खत्म है।
ओपीडी में भी खत्म हैं अनेक दवाइयां
प्रदेश सरकार ने एक जनवरी से सभी सामान्य अस्पतालों में हर तरह की दवाइयां व इलाज फ्री करने की घोषणा कर रखी है, मगर अव्यवस्थाओं के चलते मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अब भी ओपीडी में अनेक महत्वपूर्ण दवाइयां खत्म है, जिनके लिए मरीजों को बाजार की दुकानों पर जाना पड़ता है। ओपीडी में फिलहाल बच्चों के बुखार आईबूपैरा, मैट्रोजिल के अलावा एंट्रीबाइटिक दवाइयां खत्म हैं। स्कीन रोग की तो कोई ट्यूब नहीं जबकि कोई भी एंटीबायोटिक ट्यूब भी नहीं है।