एनएच-8 पर स्थित जिले के गांव खलियावास में शुक्रवार शाम अचानक उल्टी-दस्त से लोगों की तबीयत बिगड़ गई। एकाएक गांव के कई लोगों को यह शिकायत हुई तो तुरंत डॉक्टर के पास ले जाया गया। इसके कुछ देर बाद ही और ग्रामीणाें की भी तबीयत बिगड़ी तो ग्रामीणों ने मामले की सूचना 102 नंबर पर सिविल अस्पताल पर दी।
अस्पताल से एंबुलेंस मौके पर भेजकर मरीजाें को ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया। कुछ मरीजों को धारूहेड़ा और गुड़गांव के अस्पतालों में भी भर्ती करवाया गया है। डॉक्टराें के मुताबिक दूषित पेयजल से ग्रामीणाें को डायरिया की शिकायत हुई है।
गांव खलियावास में दोपहर बाद अचानक ग्रामीणाें को उल्टी दस्त की शिकायत होने लगी। शुरूआत मेें इसे नजरअंदाज किया गया, लेकिन बाद में कई और लोगाें की इसी तरह शिकायत हुई तो ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। मामले की सूचना सिविल अस्पताल में दी गई, जिसके बाद मौके पर एंबुलेंस और डॉक्टराें की टीम भेजी गई।
डॉक्टराें की टीम ने मौके पर जाकर मरीजों का उपचार शुरू किया और मरीजाें के लक्षण देखकर उन्हें ओआरएस घोल और दवाइयां दी। जिन मरीजाें की हालत अधिक बिगड़ी देखी तो उन्हें रेवाड़ी के ट्रामा सेंटर में रेफर कर दिया। कुछ मरीजाें ने धारूहेड़ा और गुड़गांव के अस्पतालाें की ओर भी रुख किया। ट्रामा सेंटर में शाम करीब 8:00 बजे तक 30 से 35 मरीज आ चुके थे। इन सभी मरीजाें को उल्टी दस्त की शिकायत थी।
अस्पताल में भर्ती शेर सिंह, गायत्री देवी, विकास, प्रियंका, निकिता, सोनू, प्रियंका कुमारी, रामसिंह, राजू, फूलसिंह, मेवा, भगवती, धनीराम ने बताया कि दोपहर के बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। शुरूआत उल्टी-दस्त से हुई। उन्होंने बताया कि 10 माह का बच्ची हृषिता भी उल्टी दस्त से पीड़ित है।
गांव के करीब 150 लोग डायरिया से पीड़ित हो गए हैं। जिन्हें अलग-अलग अस्पतालाें में उपचार के लिए ले जाया गया है। उन्होंने बताया कि पानी पीने के बाद उन सबकी हालत बिगड़ी है। लोगाें ने दूषित पानी की बोतल से भरे सैंपल भी डॉक्टराें को दिखाए। वहीं अस्पताल के डॉक्टराें की एक टीम गांव में मरीजों का उपचार कर रही है।
-क्या है मामला
गांव खलियावास के नजदीक ही एक बीयर फैक्ट्री है। आरोप है कि इससे निकलने वाले दूषित पानी को खाली प्लाट में छोड़ने के अलावा बोरिंग कर जमीन में भी डाला जाता है। ग्रामीणाें के अनुसार फैक्ट्री से निकलने वाला दूषित पानी पेयजल पाइप लाइन के लीक होने के कारण पानी में मिल गया। इस कारण पानी पीने से उनकी हालत बिगड़ गई। ग्रामीणाें का कहना है कि इस बारे में कई बार प्रशासन को शिकायत दी जा चुकी है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
सूचना मिलने के साथ ही गांव में डॉक्टराें की टीम भेज दी गई है। पानी की समस्या के कारण ग्रामीणों में डायरिया की बीमारी फैली है। गांव के नजदीक बीयर फैक्ट्री से निकलने वाला दूषित पानी पेयजल आपूर्ति में मिलने से यह स्थिति पैदा हुई।
गांव में गई टीम ने 40 से अधिक मरीजों की जांच की है। साथ अन्य मरीजों को अस्पताल भी उपचार के लिए भेजा है। शनिवार सुबह गांव में एक टीम भेजकर पानी की सैंपलिंग कराई जाएगी। जरूरी हुआ तो हाउस टू हाउस मरीजों की जांच की जाएगी। - डा. लाल सिंह, जिला स्वास्थ्य अधिकारी