बात निकली है तो दूर तलक जाएगी। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रमुख सचिव राजेंद्र कुमार के दफ्तर और घर पर पड़े सीबीआई छापे के बाद एक बार फिर क्रिकेट में भ्रष्टाचार के जिन्न को बोतल से बाहर निकाल दिया है। दिल्ली जिला क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) में हुए कथित घोटाले को जिस आक्रामकता के साथ आम आदमी पार्टी ने उठाकर केंद्र की मोदी सरकार की धुरी माने जाने वाले वित्त मंत्री अरुण जेटली को निशाने पर लिया है, उससे न सिर्फ सियासी पारा चढ़ गया है, बल्कि अगर इस मामले की निष्पक्ष जांच हो गई तो बात सिर्फ डीडीसीए तक ही नहीं रुकेगी, कई दूसरे सियासी दिग्गज भी झमेले में फंस सकते हैं। क्योंकि एक बार फिर देश के इस सर्वाधिक लोकप्रिय खेल के भ्रष्टाचार का मुद्दा गरम होगा और यह बात फिर सामने आएगी क्रिकेट की पिच पर खिलाड़ी भले एक दूसरे के खिलाफ बाउंसर फेंकते हों और रन बनाते हों, लेकिन क्रिकेट की कमान संभालने वाले सियासतदां एक दूसरे को कभी भी आउट नहीं होने देते। लेकिन डीडीसीए के आरोपों की जांच के लिए दिल्ली की आम आदमी सरकार ने जांच आयोग बनाकर क्रिकेट के हम्माम का सच सामने लाने की जो कवायद शुरु की है, उससे भाजपा के साथ कांग्रेस के कुछ नेताओं पर भी कीचड़ उछल सकती है। इसे लेकर घमासान इतना बढ़ गया है कि डीडीसीए मामले को लेकर जेटली ने केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेताओं और अपनी पार्टी के सांसद कीर्ति आजाद के खिलाफ मानहानि का मुकदमा करने का फैसला किया, वहीं आम आदमी पार्टी ने जेटली को मंत्री पद से बर्खास्त करने की मांग करते हुए सड़क पर उतरने का ऐलान कर दिया है।
क्रिकेट के खेल में सट्टेबाजी से लेकर मैच फिक्सिंग, खिलाड़ियों के चयन, महंगे और ग्लैमर से भरपूर आईपीएल सीरीज के घपले, अंडर वर्ल्ड की घुसपैठ, काले धन का बोलबाला और सियासी दंगल के आरोपों की लंबी फेहरिस्त के तार एक दूसरे से इस कदर जुड़े हुए हैं कि एक गांठ खुलते ही पूरा सिज़रा सामने आने लगता है और इसके बाद दलगत राजनीति से ऊपर उठकर हमारे राजनेता अपनी अद्भुत एकता का प्रदर्शन करके मामले को फिर ठंडा कर देते हैं। मैच फिक्सिंग, सट्टेबाजी, आईपीएल घोटाले सबमें यही हुआ। डीडीसीए में आर्थिक गड़बड़ियों की शिकायत का पुलिंदा लिए पूर्व क्रिकेटर और भाजपा सांसद कीर्ति आज़ाद कई सालों से मीडिया से लेकर संसद तक अपनी आवाज उठा चुके हैं। उनकी लिखित शिकायत पर यूपीए सरकार ने कारपोरेट मामलों के मंत्रालय के विभाग एसएफआईओ (सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन आर्गेनाइजेशन) से जांच कराई। जांच रिपोर्ट में डीडीसीए में तमाम वित्तीय अनियमितताओं की बात मानी गई, लेकिन तत्कालीन अध्यक्ष अरुण जेटली को क्लीन चिट दे गई। अब भले ही कांग्रेस जेटली का इस्तीफा मांग रही है, लेकिन मोदी सरकार, भाजपा और जेटली की ढाल कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार की यही जांच रिपोर्ट है। अब एक जांच यह भी होनी चाहिए कि जब कीर्ति आज़ाद की शिकायत की जांच हो रही थी तब तत्कालीन यूपीए सरकार में कार्पोरेट मामलों का मंत्री कौन था और क्रिकेट से जुड़े कांग्रेस के नेताओं और यूपीए के दिग्गज मंत्रियों ने इसमें क्या कोई भूमिका निभाई।
क्रिकेट के गोरखधंधे में मनी माफिया और मैन्युपुलेशन का इतना बोलबाला है कि सुप्रीम कोर्ट तक को इस मामले में दखल देकर इसकी सफाई के लिए कठोर कदम उठाने पड़े। कहा यह भी जाता है कि सुनंदा पुष्कर की संदिग्ध मौत जिसमें पुलिस हत्या के संदेह के कोण की भी जांच कर रही है, के तार भी क्रिकेट के ही गोरखधंधे से जुड़े होने का आरोप भी लग चुका है।
सूत्रों के मुताबिक शशि थरूर से शादी से पहले सुनंदा दुबई में रहती थीं और वहां के हाई प्रोफाइल सामाजिक सर्किल में उनकी खासी आवाजाही थी। यहीं उनका संपर्क कुछ ऐसे लोगों से भी हुआ जिनके तार क्रिकेट माफिया से जुड़े हैं। इसलिए उनके पास तमाम ऐसी सूचनाएं और जानकारियां थी जो अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में चल रहे सट्टेबाजी और फिक्सिंग के गोरखधंधे से जुड़े कुछ सफेदपोशों को बेनकाब कर सकती थीं। शशि थरूर की भी क्रिकेट में खासी दिलचस्पी रही है और जब वह यूपीए सरकार में राज्य मंत्री थे, तब शादी से पहले उन्होंने अपनी मित्र सुनंदा पुष्कर को आईपीएल की क्रिकेट टीम में कुछ हिस्सेदारी दिलवाई थी, जिसे लेकर जबर्दस्त विवाद हुआ था। उसकी वजह से ही थरूर को मंत्रिपद से इस्तीफा देना पड़ा था। मामला ठंडा पड़ने पर कुछ समय बाद उनकी सरकार में फिर वापसी हुई थी।
क्रिकेट की दुनिया से जुड़े कुछ सूत्रों का कहना है कि यूपीए सरकार के दौरान जब आईपीएल में सट्टेबाजी और फिक्सिंग का खुलासा हुआ और उसे लेकर मुंबई और दिल्ली पुलिस ने अलग अलग जांच शुरु की तो क्रिकेट की दुनिया से लेकर सियासी जगत तक हड़कंप मच गया। इस मामले में बीसीसीआई अध्यक्ष श्रीनिवासन, उनके दामाद गुरु मयप्पन से लेकर कुछ शीर्ष क्रिकेट खिलाडिय़ों तक पर उंगली उठी। बताया जाता है कि इस मामले की जांच जब आगे बढ़ रही थी तो इसकी जद में कुछ बड़े रसूखदारों पर भी घेरा कस सकता था। सियासी दबाव में न सिर्फ जांच को कमजोर किया गया बल्कि इसके एवज में देश के एक शीर्ष पुलिस अधिकारी और एक शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी को राजनीतिक फायदा भी दिया गया।
माना जा रहा है कि डीडीसीए के घोटाले की बंदरबांट और इसे दबाने में भी कुछ दिग्गजों का यही गठजोड़ काम कर रहा है। जहां भाजपा, कांग्रेस और कुछ अन्य दलों के कई शीर्ष नेता क्रिकेट के इस दलदल में आकंठ डूबे हैं, वहीं राजनीति में नई नवेली दिल्ली की आम आदमी पार्टी के नेता अभी इससे दूर हैं। इसलिए उन्होंने डीडीसीए घोटाले के जरिए क्रिकेट के इस गोरखधंधे की पूरी तह तक पहुंचने की ठानी है। इसलिए आने वाले दिनों में आम आदमी पार्टी के बाउंसरों का सामना केंद्र सरकार भाजपा और दूसरे राजनीतिक दलों के क्रिकेट से जुड़े नेताओं को करना पड़ सकता है। आप इस क्रिकेट के भ्रष्टाचार के जरिए भाजपा और कांग्रेस दोनों को घेरना चाहती है। डीडीसीए की जांच के लिए आयोग बनाकर दिल्ली सरकार केंद्र में यूपीए सरकार के दौरान कार्पोरेट मंत्रालय के गंभीर आर्थिक अपराध कार्यालय द्वारा डीडीसीए में वित्तीय अनियमितताओं की बात मानते हुए भी शीर्ष लोगों को क्लीन चिट दिए जाने को लेकर भाजपा के साथ कांग्रेस के लिए भी मुश्किल पैदा कर सकती है।