बारिश का सीजन आने से पहले जिला प्रशासन के आदेशों पर जनस्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की ओर से शहर के सभी नालों की सफाई करवाए जाने के दावे किए गए थे।
जिला प्रशासन ने दावा किया था कि शहर के नालों व सीवरेज की सफाई के लिए दो करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। लेकिन, प्रशासन के दावे रविवार सुबह आई बारिश में बहते नजर आए। कई इलाकों में तो हालात ये थे कि जनस्वास्थ्य विभाग की टीम को मौके पर पहुंचना पड़ा।
पार्षदों में रोष
‘वार्ड का बुरा हाल रहा, खासकर गौड़ कालेज को जाने वाले रोड पर। सड़क बनने के कारण सारा मलबा रोड पर पड़ा है। घरों में पानी भर गया।’ सुशीला इंदौरा, पार्षद, वार्ड-3।
‘वार्ड में वैसे तो पानी कई इलाकों में भरा, लेकिन सबसे ज्यादा दिक्कत पेट्रोल वाली गली में आई। वहां से फोन आए कि इलाके में पानी भर गया है।’ ममता रानी, पार्षद, वार्ड-2।
‘वार्ड 1 में माता दरवाजा और डेयरी मोहल्ला इलाके का सारा पानी बहकर नेहरू कालोनी में एकत्र हो गया। बाल्टियों में भरकर पानी निकालना पड़ा।’ -सुनीता रानी, नागरिक, नेहरू कालोनी।
‘हालात 1995 की बाढ़ से भी ज्यादा बुरा हाल था। स्थानीय विधायक को सर्वश्रेष्ठ का अवार्ड मिला है, उन्हें किस आधार पर मिला है समझ से परे है।’ बलराज सिंह बल्लू, पार्षद, वार्ड 9
‘सब जगह पानी है। पानी को अपलिफ्ट करने की योजना पर 35 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। हर साल ड्रेनेज की सफाई को लेकर खर्च किया जाता है।’ अशोक खुराना, पार्षद, वार्ड 10
‘सीवर और नालों की सफाई के लिए 2 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, लेकिन जिस तरह से जलभराव हुआ है उससे लगता है सफाई बस कागजों में है।’ -नीरा भटनागर, पार्षद, वार्ड-14