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यह कैसा आदर्श

Sun, 22 Dec 2013 07:40 PM IST
नई दिल्ली
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महाराष्ट्र की कांग्रेस-राकांपा सरकार ने आदर्श सोसाइटी घोटाले की बहुप्रतीक्षित जांच रिपोर्ट को जिस तरह खारिज कर दिया है, वह भ्रष्टाचार के मामले में कांग्रेस के दोहरे रवैये का ताजा उदाहरण है। यह वही कांग्रेस है, जिसने अभी संसद में लोकपाल विधेयक पारित कराने का श्रेय लेने की कोशिश की थी।
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आदर्श सोसाइटी की परिकल्पना मूलतः कारगिल में शहीद हुए सैनिकों के परिजनों के लिए की गई थी, लेकिन इसमें नेताओं और नौकरशाहों की दिलचस्पी इतनी बढ़ गई कि प्रस्तावित छह मंजिली इमारत इकतीस मंजिल वाली सोसाइटी में तब्दील हो गई! रिपोर्ट बताती है कि सेना को सूचित न करने और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी न लेने जैसी कई अनियमितताएं इसमें बरती गईं। जांच आयोग ने इस मामले में चार पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों, जिनमें मौजूदा गृह मंत्री भी हैं और राकांपा के दो मंत्रियों समेत कई नौकरशाहों को नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया है।

इस घोटाले से जुड़े एकाधिक नौकरशाह पहले ही गिरफ्तार किए गए हैं, लेकिन सीबीआई की पहल के बावजूद पहले महाराष्ट्र के राज्यपाल ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण की गिरफ्तारी की इजाजत न देकर, और उसके बाद राज्य की कैबिनेट ने 'सर्वसम्मति' से जांच रिपोर्ट को खारिज कर जता दिया है कि दोषी राजनेताओं को उनके भ्रष्टाचार की सजा नहीं दी जाएगी! मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण का कहना है कि जांच रिपोर्ट जनहित में खारिज की गई है, लेकिन वह यह नहीं बताते कि जिस घोटाले में बड़े राजनेता शामिल हों, उन्हें बचाना जनहित में कैसे है।
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भ्रष्टचारियों को बचाने की यह कवायद कांग्रेस तब कर रही है, जब दिल्ली और राजस्थान में उसकी सत्ता चली गई है और आगामी लोकसभा चुनाव में भी उसके लिए आसार अच्छे नहीं दिखते। जिस दौर में भ्रष्टाचार के खिलाफ पैदा जनाक्रोश से एक पार्टी जन्म ले चुकी है, उस समय घोटालों पर इस तरह की उदासीनता बरतना कांग्रेस के लिए बहुत खतरनाक हो सकता है। हाल के दौर में पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी कई बार भ्रष्टाचार बर्दाश्त न करने की बात कर चुके हैं, लेकिन आदर्श सोसाइटी घोटाले पर पर्दा डालना यह बताता है कि देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी अब भी बदलने के लिए तैयार नहीं है।
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