भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के निर्वासित अध्यक्ष एन श्रीनिवासन पर सर्वोच्च अदालत ने सख्त टिप्पणी की है और कहा है कि बोर्ड में उनकी मौजूदगी सीधे-सीधे हितों के टकराव से जुड़ी हुई है। श्रीनिवासन भले ही अभी बीसीसीआई के अध्यक्ष के रूप में काम नहीं कर रहे हैं, पर उनका बोर्ड पर पूरा नियंत्रण है, वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के अध्यक्ष हैं, इंडिया सीमेंट्स के मालिक हैं और इंडिया सीमेंट्स दो हजार करोड़ रुपये की ब्रांड वैल्यू वाली चेन्नई सुपर किंग्स की मालिक है।
यही नहीं, उनके दामाद गुरुनाथ मयप्पन की, जिन्हें मुद्गल कमेटी ने अपनी रिपोर्टे में सट्टेबाजी का दोषी पाया है, चेन्नई सुपर किंग्स में भूमिका किसी से छिपी नहीं है। इतना सब होने के बाद भी श्रीनिवासन ने बचकानी-सी दलील देने की कोशिश की है कि मुद्गल कमेटी ने उन्हें स्पॉट फिक्सिंग या सट्टेबाजी के मामलों में क्लीन चिट दे दी है, मगर सर्वोच्च अदालत ने साफ कर दिया है कि वह संदेह से परे नहीं हैं।
इंडियन प्रीमियर लीग में स्पॉट फिक्सिंग के जिन मामलों की जांच मुद्गल कमेटी ने की थी, उसमें भी बेशक श्रीनिवासन का सीधे नाम न आया हो, मगर बीसीसीआई और आईपीएल के कुछ प्रमुख अधिकारियों के साथ ही राजस्थान रायल्स के मालिक राज कुंद्रा को भी सट्टेबाजी करने और बुकियों से संपर्क रखने का दोषी पाया गया है।
यह मामला जब उजागर हुआ था, तो श्रीसंत सहित कुछ खिलाड़ियों के नाम सामने आए थे, जिन्हें जेल तक जाना पड़ा था। अब यह मामला जिस तरह आगे बढ़ रहा है, उससे लगता है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। और यदि यह दावा सही है कि श्रीनिवासन और बोर्ड के खिलाफ इस कानूनी लड़ाई में आईपीएल के पूर्व प्रमुख ललित मोदी पैसा लगा रहे हैं, तो समझा जा सकता है कि यह लड़ाई किन लोगों के बीच चल रही है।
असल में यह सारा मामला दुनिया के सबसे धनी खेल संगठनों में से एक पर कब्जे की लड़ाई लगता है। बीसीसीआई तो पहले ही धनी बोर्ड था, आईपीएल ने क्रिकेट को ऐसे तमाशे में बदल दिया, जिसमें बड़ी कंपनियां और फिल्म सितारे तक पैसा लगाने को तैयार हो गए। वास्तव में अब समय आ गया है कि भारत में क्रिकेट को बचाने के लिए क्रांतिकारी कदम उठाए जाएं। इसमें पूर्व प्रतिष्ठित क्रिकेटरों की बड़ी भूमिका हो सकती है, मगर क्या वे आगे आएंगे?