आचार संहित लगते ही शहर में होने वाले करोड़ों रुपये के विकास कार्यों पर तलवार लटक गई है।
नगर निगम प्रशासन द्वारा हाल ही में जारी किए वर्क आर्डर होने के बाद भी ये विकास कार्य अब अधर में लटक गए हैं।
करोड़ों रुपये के विकास कार्यों में सबसे ज्यादा उन लोगों को परेशानी होने वाली है जिनके घरों के सामने या तो सीवरेज लाइन बिछनी थी या फिर उनकी गली में पेयजल पाइप डाली जानी थी।
कई ऐसे कार्य भी हैं जिनके टेंडर हुए 15 दिन से ज्यादा बीत गए हैं, लेकिन उनके वर्क आर्डर जारी नहीं हुए हैं। ऐसे में इन विकास कार्यों को कराने के लिए एक बार फिर से निगम को टेंडर प्रक्रिया शुरू करनी पड़ेगी। इससे निगम पर अनावश्यक रूप से लाखों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना है।
विशेष रूप से जारी वर्क आर्डर, पर नहीं होंगे काम
शहर के विकास के लिए हाल ही में मेयर रेणु डाबला के नेतृत्व में कुछ पार्षदों ने निगम आयुक्त एवं उपायुक्त डॉ.अमित कुमार अग्रवाल से मुलाकात की थी। इसके बाद निगम प्रशासन ने कुछ महत्वपूर्ण कार्यों की सूची पार्षदों से मांगी थी और निगम फंड से पैसा अलाट करने की बात कही थी।
इसी के तहत करीब 10 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के पिछले एक-दो दिनों में ही वर्क आर्डर भी जारी कर दिए थे। लेकिन आचार संहिता लागू होने के कारण अब इन वर्क आर्डर पर भी काम नहीं करा सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि निगम को जारी होने वाले 30 करोड़ रुपये की ग्रांट पर भी अब तलवार लटक गई है।
12 करोड़ रुपये के टेंडर खुले पर नहीं हुए विकास कार्य जारी
निगम सूत्रों की मानें तो करीब 12 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के प्रशासन ने टेंडर खोले थे। इन टेंडरों को खोलने के बाद ठेकेदारों को वर्क आर्डर जारी करने के लिए निगम की ओर से 30 से 45 दिन का समय दिया गया था। लेकिन, इन सभी टेंडरों में विकास कार्यों को नहीं जोड़ा गया है। ऐसे में निगम को दोबारा से विकास कार्यों को कराने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करनी होगी। इससे निगम को जहां लाखों रुपये का नुकसान होगा वहीं, दूसरी ओर लोगों को विकास के लिए फिर से लंबा इंतजार करना पड़ेगा। प्रेस क्लब और पुस्तकालय के निर्माण के लिए टेंडर रखा था इनका निर्माण करीबन 50 लाख रुपये से होना था, लेकिन अब दोबारा करना पड़ेगा। सुखपुरा गांव में बड़ा कम्यूनिटी सेंटर बनना था, जिस पर करीब डेढ़-दो करोड़ रुपये की लागत आनी थी। वह भी रुक गया।
पार्षदों का कहना है कि ...
वार्ड में 21 विकास कार्यों के वर्क आर्डर जारी होने के 15 दिन बाद भी आज तक काम शुरू नहीं हुआ है। अब विकास कार्य शुरू करवाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
नीरा भटनागर, पार्षद, वार्ड-14।
मेरे वार्ड में कई बड़े काम थे। पिछले काफी समय से शोर मचा कर तो उनके टेंडर जारी हुए, लेकिन वर्क आर्डर जारी नहीं हुए। किसी तरह वर्क आर्डर जारी हुए तो अब आचार संहिता लग गई है।
ममता रानी, पार्षद, वार्ड-2।
वार्ड-3 में कुल ढाई करोड़ रुपये के वर्क आर्डर होने थे। टेंडर कॉल कर लिए थे। लेकिन अब सभी पर आचार संहिता की तलवार लटक गई है।
सुशीला इंदौरा, पार्षद वार्ड 3।
वार्ड 17 में कई काम शुरू हो गए हैं। 7-8 काम रुक गए हैं। लेकिन ऐसे काम रुके हैं जिनसे ज्यादा परेशानी होने वाली नहीं है। मैं अपने कार्यों के लिए काफी प्रयास करता हूं।
जयकिशन शर्मा, पार्षद वार्ड-17।
शहर में होने वाले सभी विकास कार्य अटक गए हैं। निगम प्रशासन ने निगम फंड से पैसा निकाल लिया था, जिससे निगम में फंड की कमी हो जाएगी। अब तनख्वाह देने में भी दिक्कत आने वाली है।
अशोक खुराना, पार्षद, वार्ड-10