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गेस्ट टीचर पर रात को टूटा कहर

Fri, 05 Sep 2014 02:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ रोहतक
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सुबह रैली और दिल्ली रोड पर 6 घंटे जाम, लेकिन दिनभर प्रशासन को कतई चिंता नहीं की शहर की मुख्य सड़क बंद है।
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दोपहर 2 बजे से ही डीएसपी यशपाल खटाना, डीएसपी अनिल कुमार, डीएसपी करण गोयल, एसएचओ सिविल लाइन वजीर सिंह रेढू, एसएचओ महम जगबीर सिंह, एसएचओ अर्बन एस्टेट राजेंद्र सिंह की मंडली रोड किनारे बैठी रही।

पुलिस अधिकारियों से जितनी बार भी पूछा गया तो उन सभी का एक ही कहना था कि रूट डायवर्ट है, इसलिए अभी बैठे रहने दो। जब तक उनकी ओर से कोई हंगामा नहीं होता, तब तक कार्रवाई नहीं होगी।
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रात होने दो फिर देख लेंगे। रात करीब साढ़े 8 बजे एसडीएम पहुंचे। चेतावनी दी और बल प्रयोग कर अतिथि अध्यापकों को गिरफ्तार कर लिया। पौने 7 घंटे बाद रोड साफ।

पुलिस ने शांतिपूर्वक धरने पर बैठे अध्यापकों को बल प्रयोग उठाया और बसों में ठूंस-ठूंसकर भरना शुरू कर दिया और अर्बन एस्टेट थाना ले गए। मामले में 44 नामजद शिक्षकों और अन्य को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि अध्यापकों ने रोड जाम कर रखा था, जो कानूनन अपराध है।

जबकि अध्यापकों ने प्रशासन की इस कार्रवाई को तानाशाही करार दिया और कहा कि आखिर साढ़े छह घंटे तक प्रशासन को रोड जाम क्यों नजर नहीं आया? एसडीएम के सामने ही अध्यापकों ने पूछा कि अब तक आप कहां थे?
अतिथि अध्यापकों को रोकने की थी पूरी तैयारी
अतिथि अध्यापकों का पूर्व नियोजित कार्यक्रम डी पार्क स्थित मुख्यमंत्री आवास का घेराव करना था। प्रशासन ने उन्हें सेक्टर -6 मोड़ पर ही बैरिकेड्स लगाकर रोक लिया। रोहतक पुलिस के अलावा पानीपत और सोनीपत से भी पुलिस बुलाई गई थी। विभाग की ओर से 700 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया।  
थाने में भी अड़े
पुलिस करीब 50 अध्यापकों को बस में भर अर्बन एस्टेट थाने ले गई। थाने में एसडीएम दलबीर ने उन्हें बस से नीचे आने की बात कही, लेकिन अध्यापकों ने मना कर दिया। कहा कि जबरदस्ती उन्हें लाया गया है तो पुलिस ही उतारे। डीएसपी अनिल कुमार और एसडीएम ने मौजूद मीडियाकर्मियों को वहां से जाने की अपील की। इसके बाद पुलिस देररात तक सभी अध्यापकों के खिलाफ मामला दर्ज करने की कार्रवाई में लगी रही।
महिलाओं को नहीं किया गिरफ्तार
महिला अतिथि अध्यापिकाओं को बल प्रयोग के दौरान साइड में कर दिया गया और उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया। डीएसपी यशपाल खटाना ने उन्हें वहां से जाने की अनुमति दे दी।  
पुलिस ने उतारा गुस्सा
आदेश मिलते ही पुलिसकर्मी बेकाबू हो सीधे अध्यापकों की ओर दौड़ पड़े। गुस्साए पुलिसकर्मियों ने अध्यापकों के माइक और स्पीकरों को भी डंडे मार-मार कर तोड़ दिया। महिला अध्यापिकाओं ने उन्हें वहां से उठाया और चली गईं।
इन्होंने किया संबोधित
हविअसं के संगठन सचिव बलबीर सिंह, राजरानी के पिता रणधीर सिंह कुंडू, भूपिंद्र सिंह, सुरेंद्र दहिया, सुधीर नैन, रघुबीर, संत, चिरंजीलाल, सकसं के केंद्रीय कमेटी के सदस्य महेंद्र ब्योत, टीका सिंह, अशोक शास्त्री, रेखा, पवन शर्मा, पलविंद्र पानू, राजकुमार, अनिल, आजाद नैन, राधाकृष्ण, रमेश, भूप, सुरेंद्र पाल और शिव मौजूद रहे।
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आचार संहिता लागू होने से पहले आखिरी दांव
नियमित करने की मांग को लेकर अतिथि अध्यापकों ने 9 साल में केंद्र व प्रदेशस्तर पर 30 बड़े आंदोलन किए। 7 सितंबर, 2008 को आंदोलन में पुलिसकर्मियों की ओर से गोली चलाई गईं। इसमेें 40 लोग घायल हुए और जींद की शिक्षिका राजरानी की मौत हो गई। ब्लॉक और जिलास्तर पर कई विरोध प्रदर्शन हुए। सीएम सिटी होने के कारण रोहतक ही धरनास्थल बना रहा। पिछले साल गांधीगिरी दिखाते हुए परिवारजनों को साथ लेकर सड़कों पर मौन जुलूस निकाला, क्रमिक अनशन भी किया। जनवरी में जंतर-मंतर पर आमरण अनशन। 28 जुलाई से पंचकूला में शिक्षा सदन के बाहर महापड़ाव। 31 अगस्त को रोहतक में प्रदेश स्तरीय प्रदर्शन के बाद महापड़ाव जारी। अब अध्यापक आचार संहिता लागू होने से पहले आखिरी दांव लगा रहे हैं।
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