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ग्रीस में 'ना' के जश्न के बाद अब क्या?

Mon, 06 Jul 2015 12:53 PM IST
मार्क लोवेन
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ग्रीस में बेलआउट पैकेज को ज़ोरदार तरीक़े से ठुकराए जाने पर रात भर जश्न मनाया जाता रहा, लेकिन इस जश्न से आगे का रास्ता ख़ासा मुश्किल नज़र आता है।
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ग्रीस के वित्तमंत्री यानिस वरोफाकिस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह इस्तीफा ग्रीस के प्रधानमंत्री के निर्देष पर दिया है। ग्रीस की जनता ने 60 प्रतिशत से ज़्यादा वोटों से बेलआउट पैकेज को ख़ारिज कर दिया है।

यूरोपीय नेताओं ने जनमत संग्रह से पहले बार-बार ग्रीस के लोगों को चेतावनी दी थी कि अगर उनका फ़ैसला 'ना' रहा तो ग्रीस को यूरोज़ोन से बाहर जाना पड़ सकता है। लेकिन इस चेतावनी की ज़्यादा परवाह न तो ग्रीस की जनता ने की, और न ही वहां की सरकार ने।
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मुश्किल डगर

यूरोज़ोन से बाहर जाने का मतलब है यूरोपीय संघ से मिलने वाली बड़ी मदद का रास्ता बंद होना, जिसके बिना ग्रीस के लिए फ़िलहाल काम चलाना मुश्किल होगा। इसलिए ग्रीस को यूरोज़ोन के साथ जल्द से जल्द सहायता के लिए समझौता करना होगा।

जनमत संग्रह के बाद ग्रीस की सरकार बेलआउट पैकेज की शर्तें नरम कराने के लिहाज से बेहतर स्थिति में हो सकती है। हालांकि यूरोपीय संघ और ख़ास तौर से जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों के सख़्त रुख़ को देखते हुए बातचीत फिर से शुरू करना आसान नहीं होगी। ग्रीस के वित्तमंत्री भी यूरोजोन की रणनीति को 'आतंकवाद जैसा' बता चुके हैं।

बेलआउट पैकेज में आर्थिक अनुशासन के लिए कई कड़ी शर्तें जुड़ी हैं जिनमें कर बढ़ाने और सामाजिक योजनाओं पर ख़र्चों में कटौती की मांग की गई है। ग्रीस के प्रधानमंत्री इन शर्तों को 'अपमानजनक' मानते हैं. इसीलिए उन्होंने जनता से बेलआउट पैकेज को ख़ारिज करने की अपील की थी।

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एक बड़ा तबका नाखुश

जनमत संग्रह पर फैसला भले ही सरकार की योजना के मुताबिक रहा हो, लेकिन ग्रीस में अब भी एक बड़ा तबका है जो इस पूरे घटनाक्रम से ख़ुश नहीं है।

ग्रीस के बैकों में नगदी की कमी हो रही है और यूरोपीय केंद्रीय बैंक से उन्हें आपात रकम मिलना बेहद जरूरी है। आर्थिक क़िल्लत का ये आलम है कि कई बैंकों ने एटीएम मशीनों से एक दिन में निकाले जाने वाली अधिकतम राशि को सिर्फ 60 यूरो तक सीमित कर दिया है।

बैंक संकट और अस्थिरता के कारण टैक्स जुटाने में आई कमी के चलते ग्रीस की अर्थव्यवस्था फिर से कमजोर हो गई है। इन हालात में यूरोजोन और ग्रीस के बीच समझौता और मुश्किल लगता है।

दूसरी तरफ़ यूरोज़ोन की ओर से ग्रीस पर तीखे बयानों का सिलसिला जारी है। लेकिन ग्रीस की सरकार के पास भी इसका जवाब है। वो कहेगी, "हमने तो आपकी मांगों को लोकतांत्रिक कसौटी पर परखा, लेकिन लोगों ने उसे ख़ारिज कर दिया।"
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