केएम पब्लिक स्कूल मैनेजिंग कमेटी विवाद में पुलिस ने दोनों पक्षों की स्कूल में एंट्री पर बैन लगा दिया है। थाने पहुंचे दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए और तीखी नोकझोंक भी हुई। पुलिस ने दोनों पक्षों को दो दिन बाद बुलाया और किसी भी विवाद की आशंका को देखते हुए दोनों पक्षों की स्कूल में एंट्री पर बैन लगा दिया है।
गौरतलब है कि केएम संस्था की मैनेजिंग कमेटी में विवाद चल रहा है। 11 मार्च को एक पक्ष ने पिछली कमेटी को भंग किए बिना नई कमेटी का गठन कर दिया।
कालीचरण केसान को प्रधान, विजेंद्र सिंह को उप प्रधान, कृष्ण कुमार गुप्ता को मैनेजर, पवन बंसल को कोषाध्यक्ष, आपी सिंह, अजय सर्राफ, उमाकांत सुनीता देव, अजय व स्कूल प्रिंसिपल को सदस्य बनाया दिया।
इस मामले में प्रेस कान्फ्रेंस के बाद चेयरमैन रमेश कुमार और ट्रस्टी सिविल लाइन थाने में दूसरे पक्ष के खिलाफ शिकायत देने पहुंचे। सूचना पर कालीचरण केसान पक्ष भी थाने पहुंच गया। दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक हुई। विजय बंसल टैणी और मनीष सिंघानिया के बीच कहासुनी हुई।
‘एसएचओ से नहीं, दूसरे से जांच करवाएं’
थाने में हंगामे के बाद एक पक्ष पहले पुलिस अधीक्षक और बाद में रेस्ट हाउस में हरियाणा-पंजाब हाईकोर्ट के न्यायाधीश एमएस चौहान से मिला। पुलिस अधीक्षक को संस्था सदस्यों ने बताया कि उन्हें सिविल लाइन थाना के एसएचओ की कार्रवाई पर यकीन नहीं है। ऐसे में जांच किसी अन्य एसएचओ या डीएसपी से करवाई जाए। पुलिस अधीक्षक ने किसी अन्य अफसर से जांच करवाने का आश्वासन दिया। वहीं न्यायाधीश के पास उठे मुद्दे के बाद जज ने भी उन्हें आश्वासन दिया कि किसी तरह का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
ट्रस्टी नहीं हैं कालीचरण केसान
चेयरमैन रमेश कुमार मोडा, ट्रस्टी राजेश कुमार, ट्रस्टी और स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के चेयरमैन मनीष कुमार सिंघानिया रायगढ़ से भिवानी पहुंचे। प्रेस कान्फ्रेंस में कालीचरण केसान की कमेटी को फर्जी कमेटी बताते हुए धोखाधड़ी करने, ट्रस्ट के सदस्य नहीं होने के बावजूद रिकार्ड से छेड़छाड़ करने के आरोप लगाए। चेयरमैन रमेश कुमार, ट्रस्टी राजेश और मनीष ने बताया कि कालीचरण केसान ट्रस्ट के सदस्य ही नहीं हैं। 21 फरवरी 2010 में संस्थान में गबन करने और संस्थान विरुद्ध कार्य करने के चलते उन्हें ट्रस्ट से निकाल दिया गया था। वर्ष 2011 में उन पर धोखाधड़ी का मामला भी दर्ज हुआ था। अब साथियों के साथ मिलकर ट्रस्ट पर कब्जा करना चाहते हैं।
कोट्स
कालीचरण केसान संस्था का ट्रस्टी या सदस्य नहीं है। वह संस्थान पर कब्जा करना चाहता है। उसने गलत तरीके से कमेटी बनाई है।
- रमेश कुमार मोड़ा, चेयरमैन केएम ट्रस्ट
1957 से ट्रस्टी हूं। फरवरी 2010 में कुछ लोगों ने प्रस्ताव पास कर ट्रस्टी पद से हटाया था मगर कोर्ट ने उस प्रस्ताव पर पाबंदी लगा दी। फिलहाल वह ट्रस्टी है। - कालीचरण केसान
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हालात बिगड़े तो स्टूडेंट् को होगी दिक्कत
केएम संस्था के दो स्कूल और एक कालेज है। पहली से पांचवीं कक्षा तक केएम शिशु विहार है और केएम सीनियर सेकेंडरी स्कूल है। स्कूल के बगल में ही केएम बीएड कालेज है। केएम संस्था के प्रबंधन को लेकर छिड़ी पद की जंग जल्द नहीं निपटी तो सीधा असर स्कूल में पढ़ने वाले करीब 2760 स्टूडेंट्स पर पड़ेगा। गौरतलब है कि पदाधिकारियों के आपसी झमेलों के चलते आदर्श महिला कालेज में जिला प्रशासन को प्रबंधक की नियुक्ति करनी पड़ी। हलवासिया विद्या विहार स्कूल में मैनेजमेंट द्वारा टीचर हटाने के विरोध में कई दिन विवाद की स्थिति रही।