विश्व कप क्रिकेट में भारत की इससे बेहतर शुरुआत नहीं हो सकती थी। पहले ही मैच में अपने चिर प्रतिद्वंद्वी को पराजित कर महेंद्र सिंह धोनी के धुरंधरों न सिर्फ विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ जीत का अपना रिकॉर्ड बरकरार रखा है, बल्कि यह विजय टूर्नामेंट में टीम इंडिया का मनोबल ऊंचा करने की भी वजह बनेगी।
विश्व कप में भारत और पाकिस्तान के बीच यह छठी भिड़ंत थी। ऐसी हर भिड़ंत बेहद रोमांचक होती है। लेकिन यह कदाचित पहला अवसर था, जब पाकिस्तान की बल्लेबाजी शुरू होने के साथ ही मैच धीरे-धीरे एकतरफा और भारत के पक्ष में झुकता चला गया। पाकिस्तान की मौजूदा टीम बेशक उतनी शक्तिशाली नहीं मानी जाती, लेकिन पिछले कुछ समय से भारत का खराब प्रदर्शन भी चिंता की वजह बना हुआ था। इसके बावजूद विश्व कप के पहले मैच में भारतीय टीम की लय लौटी है, तो यह आश्वस्त करने वाली बात है।
भारत की इस जीत में पूरी टीम का योगदान रहा है; कमतर आंकी जाने वाली हमारी गेंदबाजी ने जहां पाकिस्तान को लक्ष्य से छिहत्तर रन पहले ऑल आउट कर दिया, वहीं विराट कोहली, सुरेश रैना और शिखर धवन की बल्लेबाजी और धोनी की कप्तानी ने जीत को सुगम बनाया। पर इस जीत के अगर कोई नायक हैं, तो वह निर्विवाद रूप से विराट कोहली हैं, जो बड़े मैचों में हमेशा कसौटी पर खरे उतरते हैं। विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ सचिन तेंदुलकर के सर्वोच्च रनों का रिकॉर्ड तोड़कर शतक बनाने वाले वह पहले भारतीय बने, तो एकदिवसीय क्रिकेट में सौरव गांगुली के बाईस शतकों की बराबरी भी उन्होंने कर डाली। अलबत्ता बड़ी जीत के बावजूद खुशफहमी से बचने की जरूरत है, क्योंकि यह पहला ही मैच था, और उछाल वाली पिचों पर आगे टीम इंडिया के सामने बड़ी चुनौतियां होंगी।
इस जीत को न सिर्फ खेल भावना से लेने की जरूरत है, बल्कि यह भारत और पाकिस्तान के बीच बेहतर रिश्ता कायम करने का अवसर भी होना चाहिए, क्योंकि खेल दिलों और देशों को जोड़ते हैं। विश्व कप से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाक प्रधानमंत्री के साथ बातचीत की पहल इसी उद्देश्य से की थी। इसलिए बेहतर यही होगा कि यह अवसर सीमा के उस पार तोड़फोड़ या पाक सैनिकों की हताश गोलीबारी के बजाय आपसी दोस्ती और विश्वास का जरिया बने।