मंडी के वार्ड नंबर पांच में चल रही आंगनबाड़ी में हाजिरी का खेल चल रहा है। यहां कार्यरत महिला हेल्पर पर फरवरी में कथित तौर पर चार दिन आकर पूरे महीने का वेतन लेने का आरोप है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने इसकी रिपोर्ट भी तैयार की है। इस मामले में हेल्पर सुनीता से बातचीत नहीं हो सकी।
आंगनबाड़ी केंद्र में रखे हाजिरी रजिस्टर के रिकॉर्ड के अनुसार फरवरी 2014 में हेल्पर सुनीता पूरे माह में महज चार दिन ही आई हैं। जबकि वेतन रिकार्ड के अनुसार सुनीता को 27 दिन का 3375 रुपये वेतन दिया गया है। फरवरी में सुनीता को एक दिन ही गैर हाजिर दिखाया गया है। जबकि फरवरी में सुनीता 24 दिन गैर हाजिर रही हैं। जनवरी में भी ऐसा ही हुआ है। हाजिरी रजिस्टर में 11 दिन उपस्थित दिखाई गई है, जबकि वेतन पूरे महीने का निकाला गया है। इससे साफ लगता है कि हेल्पर सुनीता को बिना कार्यालय में आए ही विभाग के कर्मचारियों की मर्जी से वेतन दिया गया है। इस मामले में कितना गोलमाल हुआ है इसका पता तो पूरे मामले की जांच के बाद ही सामने आएगा। सीआईडी विभाग उचाना के फिल्ड ऑफिसर विनोद शर्मा ने बताया कि हाजिरी रजिस्टर, निकाले गए वेतन वाले रजिस्टर की कॉपी रिपोर्ट के साथ लगाकर उच्चा धिकारियों को भेज दी गई है।
मिली थी गैर हाजिर
फरवरी में मैं 21 फरवरी को चेकिंग के लिए गई थी। उस दिन हेल्पर सुनीता गैर हाजिर थी।
कविता, सुपरवाइजर, वार्ड नंबर 5, उचाना।
सीडीपीओ के रिकार्ड के अनुसार बना वेतन
सीडीपीओ मैडम ने जो रिकॉर्ड मेरे पास भेजा उसके अनुसार ही वेतन निकाला गया है। इस मामले में सीडीपीओ मैडम को ही पता है।
अभय राम, क्लर्क, बाल विकास विभाग, उचाना।
अनपढ़ है हेल्पर
हेल्पर सुनीता अनपढ़ है जो हाजिरी लगा नहीं पाती। आंगनबाड़ी वर्कर के साथ इसका आपस का झगड़ा है इसलिए हाजिरी नहीं लग पाई। वेतन बनाने के दौरान हाजिरी देख कर वेतन बनाया गया है। सुपरवाइजर के रजिस्टर में हाजिरी के हिसाब से वेतन बनाया गया है। आंगनबाड़ी सुपरवाइजर के रिपोर्ट में हाजिरी दिखाई गई है।
सुमित्रा, महिला एवं बाल विभाग अधिकारी, उचाना।