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फ्रांस दौरे की उपलब्धि

Sun, 12 Apr 2015 07:54 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
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तीन देशों के दौरे के क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब जर्मनी पहुंच चुके हैं, जहां हनोवर मेले में शिरकत करने के अलावा वह दोतरफा व्यापार को आगे बढ़ाने के साथ-साथ कूटनीतिक रिश्ता मजबूत करने के लिए भी कई कदम उठाएंगे। लेकिन अपनी यात्रा के पहले ही पड़ाव फ्रांस में उन्होंने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वे भी उतनी ही ध्यान देने लायक हैं। दोनों देशों के बीच कुल 17 समझौते हुए हैं। फ्रांस ने भारत में रेलवे, रक्षा और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में दो अरब यूरो के निवेश का वायदा किया है, तो जैतापुर में परमाणु परियोजना पर जो गतिरोध पैदा हो गया था, उसे खत्म करते हुए काम आगे बढ़ाने की पहल भी हुई है।
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इसी तरह फ्रांस में भारतीय प्रधानमंत्री की 'मेक इन इंडिया' के प्रति जैसी उत्सुकता देखी गई, और प्रमुख विमानन कंपनी एयरबस से लेकर दूसरी बड़ी कंपनियों ने भारत में निवेश का जो वायदा किया है, उनसे उम्मीदें जगती हैं। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके का सदुपयोग संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग करने में किया।

इन सबसे महत्वपूर्ण अलबत्ता 36 राफेल लड़ाकू विमानों की सीधी खरीद का वह दूरदर्शी फैसला है, जिससे हमारी वायुसेना को नवजीवन मिलेगा। दरअसल पिछले 17 वर्षों से वायुसेना में लड़ाकू विमानों की खरीद नहीं हुई है। ऐसे में नई पीढ़ी के युद्धक विमानों से वंचित देश के सामने चीन और पाकिस्तान से मुकाबला करने की चुनौती थी। कुछ वर्ष पहले 126 राफेल विमानों की खरीद का करार फ्रांस की कंपनी से हुआ था, पर कई वजहों से उस पर अभी तक अमल नहीं हो पाया है। ऐसे में, उस सौदे को प्रभावित किए बगैर प्रधानमंत्री मोदी ने शीर्ष स्तर पर फ्रांस से यह करार किया। इस करार के तहत अगले दो वर्षों में ये विमान हमारी वायुसेना को सौंप दिए जाएंगे।
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हालांकि इस समझौते में तकनीकी हस्तांतरण का प्रावधान नहीं है, जो 'मेक इन इंडिया' की भावना के विपरीत है। वरिष्ठ भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी तो राफेल लड़ाकू विमान को कमतर बताते हुए इस सौदे को रद्द करने की भी मांग कर रहे हैं। लेकिन सामरिक जरूरत को देखते हुए सरकार को यह फैसला लेना पड़ा है, जिसे रक्षा विशेषज्ञों से लेकर विपक्षी नेता तक सही निर्णय बता रहे हैं।
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