फिल्म 'कार्तिक कॉलिंग कार्तिक' में फरहान अख्तर पोर्टरेयिंग शिजोफ्रेनिया नामक बीमारी से ग्रस्त है जिसमें हीन भावना और आत्मविश्वास की भरपूर कमी है। उसके अंदर के मन का डर ही उसके लिए जानलेवा बन जाता है।
ठीक यही बीमारी फिल्म 'वो लम्हे' में कंगना रानाउत में दिखाई गई है। फिल्म 'झूठा ही सही' में पाखी टायरवाला (मिशका) डिप्रेशन में आकर कई बार आत्महत्या करने की कोशिश करती है।
फिल्म 'वी आर फैमिली' में काजोल टर्मिनल कैंसर से पीडि़त है जिसे पता है कि कुछ समय बात ही उसकी मृत्यु हो जाएगी।
सवाल - क्या फिल्मों में बीमारियों को गंभीरता से चित्रित किया जाता है ?