गुजरात में में बादलों को मनाने की अनूठी परंपरा है। यहां एक कुंवारे लड़के को पेड़ के पत्तों से बने कपड़े पहनाकर गांव भर में परिक्रमा कराई जाती है। युवक हर घर में जाकर मेह (बारिश ) की प्रार्थना करता है और घर के लोग उस पर पानी डालते हैं। इससे रूठे बादल बरस पड़ते हैं।
ठीक इसी तरह निमाड़ और मालवा में अविवाहित कन्या को मेंढकी की तरह बनाकर उसे पलाश के पत्तों से बने कपड़े पहनाए जाते हैं। लड़की भी घर घर जाकर मेह मांगती है और घर घर में उसके ऊपर पानी डाला जाता है।