पाली जिले के कई गांवों में दूधली नामक परंपरा बारिश लाने का अचूक नुस्खा है। यहां स्थानीय लोग बालाजी मंदिर में एक नई मटकी लेकर उसमें शुद्ध जल डालने के बाद मटके के नीचे छोटा छिद्र कर देते हैं। उस छिद्र से निकलने वाले पानी से बालाजी महाराज को नहलाया जाता है। गांव में मटकी की परिक्रमा लगाने के बाद मटकी को मंदिर ले जाकर खाली कर फोड़ दिया जाता है। कहते हैं कि इस परंपरा से इंद्र देवता खुश होते हैं और उस साल बारिश जल्द आती है।