अगर आप गर्मियों में कार और फ्लोर क्लीन करने के लिए सैकड़ों लीटर पानी बहा देते हैं तो उनके बारे में भी एक बार जरूर सोचिए जिन्हें आजादी के 63 साल बाद भी बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है।
देश के कई हिस्से ऐसे हैं जहां पानी के कारण जिन्दगी तबाह हो रही है। जल संसाधन मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि अकेले मध्यप्रदेश के 2651 स्थानों पर फ्लोराईड की मात्रा और 261 स्थानों पर लवणता की मात्रा सामान्य से अधिक है। मध्यप्रदेश जैसी स्थिति बिहार और कर्नाटक में भी है।
लेकिन राजस्थान में पानी में मौजूद फ्लोराईड ने भयानक रूप धारण कर रख है। राजस्थान में फ्लोराइड की मात्रा 10 हजार से अधिक स्थानों पर पायी गई है। जबकि 20 हजार से अधिक स्थानों पर नाईट्रेट की मात्रा अधिक पायी गयी है। पानी में मौजूद इन अशुद्घियों के कारण राजस्थान का बांकापट्टी गांव कुबड़ों के गांव के नाम से जाना जाने लगा है।
बांकापट्टी और इसके आस-पास के कई गांवों की स्थिति इतनी बदतर है कि आप इसकी कल्पना तक नहीं कर सकते। यहां पानी में लगभग 3 हजार मिलीग्राम टीडीएस मौजूद है। इस पानी को पीने के कारण यहां के बच्चे कम उम्र में ही बूढ़े नजर आने लगते हैं। युवावस्था में ही कमर झुक जाती है और जोड़ों में दर्द के कारण लोग खाट पकड़ लेते हैं। इस जहरीले पानी को पीने के कारण असमय ही लोगों की मृत्यु हो जाती है।