बॉलीवुड में मां के चित्रण की बात करें तो आज से दो-तीन दशकों के पहले की फिल्मों को याद करें तो ऐसी मां का चेहरा आंखों के आगे उभरता है जो भारतीय परंपरा में संपूर्ण मां के रूप में उभर कर आती है, जो त्याग की देवी है, जो दुखों का पहाड़ बिना उफ किए उठा लेती है।
बॉलीवुड की ये मां अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए जीवन भर त्याग करती रहती है। ये बेसहारा-लाचार है, किस्मत की मारी, पति की ठुकराई हुई है, जिसके दुख कभी खत्म होने का नाम नहीं लेते। लेकिन फिर भी उसमें अपने बच्चों की खातिर जीने की हिम्मत है। वह मेहनत करने से कहीं भी नहीं चूकती है। अपने बच्चों के लिए हर तरह का त्याग करने को तैयार रहती है।