बांग्लादेश में रैलियों पर प्रतिबंध के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर उतर कर पुलिस को चुनौती दी। मुसलिम विरोधी फिल्म पर अमेरिका के खिलाफ नारेबाजी करते हुए इन लोगों की पुलिस से हिंसक झड़प भी हुई। ढाका में पत्थर फेंक रहे प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठी चार्ज किया। इस दौरान कम से कम 30 लोगों के घायल होने की खबर है।
प्रदर्शन में इसलामिक पार्टियों के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। यहां प्रेस क्लब के बाहर उपद्रवियों ने एक बाइक को आग लगा दी और तीन अन्य वाहनों में तोड़फोड़ की। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि बांग्लादेश खिलाफत आंदोलन के प्रमुख मौलाना शाह अहमदुल्लाह अशरफ समेत कई अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया है। राजधानी में अमेरिकी दूतावास समेत अन्य पश्चिमी संस्थानों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
पाक में मृतकों की संख्या 23 हुई
पाकिस्तान में एक दिन पहले विवादित फिल्म के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा में मरने वालों की संख्या 23 तक पहुंच गई है। इसके साथ ही सरकार के फैसले को लेकर नई बहस छिड़ गई है। पीपीपी के नेतृत्व वाली सरकार ने शुक्रवार को ‘यौम ए इश्क ए रसूल’ की घोषणा की थी, जिससे हिंसक प्रदर्शनों को रोका जा सके। लेकिन जानकारों का कहना है कि सरकार पूरी स्थिति का आकलन करने में नाकाम रही।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार के संपादक उमर कुरैशी ने अपने संपादकीय में लिखा, ‘सरकार ने सोचा था कि उसका यह कदम धार्मिक पार्टियों को अलग-थलग कर देगा जबकि इसने उन्हें प्रोत्साहित करने का काम किया।’ गौरतलब है कि इन हिंसक प्रदर्शनों में अरबों रुपये की सरकारी एवं निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचा। सिनेमा हाल, वाहनों, दुकानों और कई अन्य संस्थानों में तोड़फोड़ एवं आगजनी की घटनाएं हुईं। अकेले कराची में दो पुलिसकर्मियों समेत 17 लोगों की मौत हो गई। जबकि पेशावर में हिंसक प्रदर्शन ने छह लोगों की जान ले ली। देश के कई शहरों में हुए प्रदर्शनों में करीब 200 लोगों के घायल होने की खबरें हैं।