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25 हजार हेक्टेयर फसल पर गहराया संकट

Sun, 08 Jun 2014 01:03 AM IST
Jhajjar
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दिन प्रतिदिन तापमान में हो रही बढ़ोतरी से अब फसलें भी झुलसने लगी हैं। खेतों में फसल को बचाए रखना इस समय किसानों के लिए चुनौती बन गया है। जिले की करीब 25 हजार हेक्टेयर फसलों पर संकट के बादल मड़राने लगे हैं। कपास, ज्वार और गन्ने के अलावा अलावा सब्जी की फसलें भी प्रभावित हो रही हैं। चूंकि इस समय नहरों में पानी नहीं है और बारिश होने में समय है, ऐसे में किसानों के लिए फसल को बचा पाना ही चुनौती है। इधर, कृषि विशेषज्ञ कहते हैं कि इस वक्त फसलों को किसान बचा लेगा तो यह बड़ी उपलब्धि होगी। फिलहाल किसानों के पास फसलों को बचाने के लिए कोई विकल्प नहीं है।
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25 हजार हेक्टेयर है रकबा
झज्जर जिले की भौगोलिक दृष्टि से बात करें तो इसका रकबा एक लाख 90 हजार है। इसमें से एक लाख 40 हजार हेक्टेयर में खेती होती है। इस समय बात की जाए तो झज्जर जिले में अभी केवल 25 हेक्टेयर में फसल है। इसमें से भी 10 हजार हेक्टेयर में ज्वार की फसल है। कपास की करीब साढे़ तीन हजार तथा पांच हजार हेक्टेयर में गन्ने की फसल है। जबकि साढ़े तीन से चार हजार हेक्टेयर में सब्जियों की फसलें खेल में लगी हैं। पशुओं के लिए ज्वार को चारे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। दूध देने वाले पशु के लिए तो यह चारा बहुत आवश्यक होता है। इस समय सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव ज्वार की फसल पर पड़ रही है। फसल को पानी उपलब्ध कराने में किसान इस लिए असमर्थ है चूंकि नहरों में पानी नहीं आ रहा। मानसून आने में अभी समय है। ऐसे में फसल को बचाना मुश्किल हो रहा है।

बढ़ते-घटते तापमान का पड़ रहा असर
बढ़ते और घटते तापमान का असर आम लोगों के साथ-साथ फसलों पर भी पड़ रहा है। दरअसल जल ही जीवन है, यह मनुष्य से लेकर पेड़ पौधे सभी के लिए जरूरी है। तापमान बढ़ता हो फसलें के जीवन की अवधि और भी घट जाती है। इस समय फसलों के साथ ऐसा ही हो रहा है।
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पूरे जिले में करीब 25 हजार हेक्टेयर में विभिन्न फसलें खेत में लगी है। मगर गर्मी के चलते फसल प्राय: सूख रही है। कपास, ज्वार और गन्ने की खेती के अलावा सब्जी पर भी दुष्प्रभाव पड़ रहा है। इस समय बारिश की संभावना नहीं है। यदि किसान फसलों में शाम के समय पानी का स्प्रे भी कर दें तो यह फायदे का सौदा साबित होगा। चूंकि पर्याप्त पानी इस समय मिलना मुश्किल है।
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- डॉ. मदन मोहन, डिप्टी डायरेक्टर, कृषि विभाग
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