संसदीय चुनाव में क्षेत्र के लोगों ने गत 10 अप्रैल को हुए मतदान में पहली बार नोटा बटन का इस्तेमाल किया। सोनीपत संसदीय सीट पर 2399 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाकर चुनाव मैदान में उतरे कुल 23 प्रत्याशियों को नकार दिया।
इवीएम में जहां 2397 वोट नोटा को मिले वहीं बैलेट पेपर से भी दो वोट नोटा के लिए भेजे गए। हालांकि कुल वोटों का यह 0.5 प्रतिशत रहा लेकिन जिस प्रकार लोगों ने पहली बार नोटा पर उंगली दबाई है उससे नेताओं के प्रति लोगों में पनप रहे आक्रोश का खुलासा भी हो गया है।
सोनीपत संसदीय सीट पर शुक्रवार को ईवीएम खुली तो लोगों में जितना उत्साह भाजपा के रमेश चंद्र कौशिक, कांग्रेस के जगबीर सिंह मलिक और इनेलो के पदम सिंह दहिया को मिले वोटों को लेकर था, उतने ही लोग यह जानने को उत्सुक थे कि नेताओं को नकारने वालों की संख्या कितनी है। सोनीपत सीट पर कुल 9 लाख 85 हजार 397 वोट पड़े थे। इनमें से 23 उम्मीदवारों के साथ नोटा भी वोट लेने वालों की लाइन में था। करीब 410 मतदाताओं में से एक मतदाता ऐसा सामने आया जिनकी अपेक्षा पर कोई प्रत्याशी खरा नहीं उतरा। कुल 2399 लोगों ने चुनाव मैदान में उतरे सभी प्रत्याशियों को नकारते हुए नोटा का बटन का इस्तेमाल किया और उपरोक्त में से कोई नहीं पर अपनी मोहर लगाई।
सोनीपत संसदीय क्षेत्र में कुल नौ विधानसभा हलके शामिल है और इन हलकों में से ऐसा कोई भी हलका नहीं रहा जहां कि लोगों ने नोटा का इस्तेमाल न किया हो। नोटा के पक्ष में सबसे ज्यादा वोट सोनीपत हलके में पडे़। यहां 769 लोगों ने सभी प्रत्याशियों को नकार दिया। जुलाना हलके में सबसे कम 156 लोगों ने नोटा का इस्तेमाल किया। लोगों ने संकेत दे दिया है कि चुनाव जीतने के बाद जनता के लिए काम न करने वालों को वापिस बुलाने के अधिकार जनता को दिए जाए। हालांकि इससे नोटा का कोई संबंध नहीं है, पर राजनीतिक विश्लेषक मानते है कि अब रि-कॉल का मौका मतदाताओं को मिलना चहिए। रिटायर्ड प्रो. डीएन शर्मा का कहना है कि लोगों ने सत्ता की कुंजी की धारणा को बदलने का काम किया है। जब पहली बार 410 में से एक व्यक्ति राजनेताओं को नकार रहा है तो आने वाले समय में इनकी संख्या अधिक हो जाएगी।
हलका वार नोटा की स्थिति कुछ इस प्रकार
हलका नोटा
गन्नौर 179
राई 235
खरखौदा 182
सोनीपत 769
गोहाना 224
बरोदा 171
जुलाना 156
सफीदों 183
जींद 298