8 वर्षीय मासूम से घर में घुसकर दुराचार के आरोपी को कोर्ट ने 20 साल कैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
घर में अपराध की नीयत से घुसने की धाराओं के तहत दोषी को तीन साल की कैद और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा भी सुनाई गई है। जुर्माने की राशि नाबालिग मासूम के पुनर्वास के लिए अदा की जाएगी। दोनो सजा एक साथ चलेंगी।
मामला 14 जून 2013 का है। थाना कलानौर अंतर्गत एक गांव निवासी व्यक्ति ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि किसी रिश्तेदार की तेरहवीं पर वह पत्नी के साथ बाहर गया था।
उसकी 8 वर्षीय बड़ी बेटी व अन्य बच्चे घर पर थे। शाम को घर पहुंचा तो उनकी बड़ी बेटी ने बताया कि पड़ोस का युवक घर में घुसा और उसके साथ गलत काम किया। शोर मचाया तो भाग गया। कलानौर पुलिस ने एक आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया। मामले के एक सप्ताह बाद जब पुलिस ने पीड़ित के 164 के बयान कराए तो सामने आया कि बच्ची के साथ गैंग रेप हुआ है। धाराओं को जोड़ते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों और अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने एक आरोपी को दोषी करार दिया है।
एसपी को दिए निर्देश
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीमा सिंघल ने मामले में एसपी रोहतक को भी निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए एक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी दुराचार मामले में 24 घंटे के भीतर पुलिस के जांच अधिकारी को पीड़ित के सीआरपीसी की धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट बयान दर्ज कराए जाने अनिवार्य हैं। आदेशानुसार यदि किसी वजह से देरी हो जाती है तो जांच अधिकारी केस डायरी में देरी के कारणों को अंकित करेगा। इलाका मजिस्ट्रेट को देरी के कारण भी बताएगा। अदालत ने कहा कि इस मामले में आईओ की ओर से मजिस्ट्रेट बयान दर्ज कराने में देरी की गई है, जो गलत है। उन्होंने एसपी को भविष्य में इन आदेशों का सख्ती से पालन करने की बात कही है।