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सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है सेल्फी का क्रेज

Thu, 19 Feb 2015 01:23 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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स्मार्ट फोन के जरिए खुद से खुद की फोटो लेने अर्थात सेल्फी का क्रेज बीमारी की हद तक बढ़ता रहा है। हाल के वर्षों में यह शब्द इतना प्रचित हुआ कि 2013 में आक्सफोर्ड को भी अपने शब्द कोश में इसे जगह देने को मजबूर होना पड़ा।
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भारत में भी इसका चलन बड़ी तेजी से बढ़ा है। विदेश दौरे पर पीएम मोदी द्वारा सेल्फी लेने की तस्वीरों ने देश की मीडिया में खूब सुर्खियां बटोरी थीं। अध्ययन के मुताबिक, फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्स एप आदि पर अब सेल्फी की होड़ इतनी बढ़ गई है कि रसूखदार हस्तियों के ऑटोग्राफ लेने की ख्वाहिश कम होती जा रही है।
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परिवार के लिए भी सेल्फी का खतरा

लंदन के मनोवैज्ञानिकों ने युवाओं के इस व्यवहार पर गहरा अध्ययन किया है। अध्ययन के मुताबिक बड़ी शख्सियतों से लेकर राजनेताओं के साथ सेल्फी का जुनून इस हद तक बढ़ गया है कि इससे परिवार के सुखमय जीवन में दखलंदाजी भी पैदा होने लगी है।
अध्ययन में पाया गया कि हर सप्ताह 1.7 करोड़ से ज्यादा सेल्फी सोशल मीडिया की साइटों पर अपलोड की जा रही हैं। इंग्लैंड के बड़े कारोबारी निगेल और ट्राकी अपनी 15 वर्षीय बेटी ओलिविया रुसेल के सेल्फी के आदी होने से इतना परेशान हुए कि मनोवैज्ञानिकों से परामर्श मांगा। मनोवैज्ञानिकों ने पाया कि युवाओं में सेल्फी की आदत बीमारी के स्तर तक जा पहुंची है।
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भारत में सेल्फी लेने का चलन बढ़ा

आईटी विशेषज्ञ राजेश चौधरी के मुताबिक जून 2014 तक एक साल में भारत के भीतर 1.6 करोड़ युवाओं ने सोशल मीडिया पर सेल्फी अपलोड कीं, जबकि वर्ष 2013 तक 18 से 24 वर्ष की आयु के युवाओं ने 3.5 करोड़ सेल्फी अपलोड कीं।

•48 प्रतिशत सेल्फी फेसबुक पर अपलोड होती हैं
•27 फीसदी सेल्फी व्हाट्स एप पर भेजी जाती हैं
•9 प्रतिशत सेल्फी ट्विटर पर भेजी जा रही हैं
•5 प्रतिशत इंस्टाग्राम पर
•5 प्रतिशत स्नेपचैट पर
•2 प्रतिशत पिनट्रैस्ट पर
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