फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फरवरी से दिसंबर तक, हर माह में जरूरी हैं ये आहार

विज्ञापन
विज्ञापन
यदि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है, तो व्यक्ति स्वस्थ रहेगा और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने के लिए संतुलित भोजन करना जरूरी है, जो पौष्टिक होने के साथ मौसम अनुरूप भी हो। अगर आप भोजन संबंधी बारह महीने के नियमों को सही ढंग से पालन करें, तो आपकी इम्यूनिटी काफी हद तक संतुलित रहती है और आप तन-मन से स्वस्थ रहते हैं।
विज्ञापन


फाल्गुन यानी फरवरी-मार्च
कभी हल्की सर्दी, तो कभी हल्की गर्मी, यह तापमान पाचन प्रणाली को प्रभावित करता है। ऐसे मौसम में खानपान हल्की ही रखें। मांस, तली-भुनी चीजों के अलावा ज्यादा मीठा खाने से परहेज करें। मौसमी साग-सब्जियों के अलावा गाजर, कच्चा चना (भूनकर), गुड़ आदि खाने में शामिल करें। व्यायाम और सुबह की सैर जरूर करें।

चैत्र यानी मार्च-अप्रैल
चैत्र के महीने में नीम की 4-5 कोमल पत्तियों को सुबह चबा सकते हैं। इससे कई प्रकार के रोग ठीक हो जाते हैं। इस माह में खानपान के प्रति विशेष सजग रहें। अगर बेल मिले, तो इसे खाने में जरूर शमिल करें। नियमित व्यायाम के साथ सुबह की सैर आपको स्वस्थ रखेगी।
विज्ञापन

अप्रैल-मई यानी वैशाख

इस महीने में अगर बेल कच्चा है, तो भूनकर खाएं और पका है, तो ऐसे भी खा सकते हैं। इस महीने में गर्मी से बचने के लिए ठंडी तासीर की चीजें अपनी डाइट में शामिल करें। आम पना भी ठीक रहेगा। अनार, सेब, नाशपाती, खुबानी, बेर आदि मौसमी फलों का सेवन जरूर करें, ये फल आपको गर्मी में सेहतमंद रखेंगे। सूर्योदय से पूर्व ही स्नान करें और हल्‍का व्यायाम। 

ज्येष्ठ यानी मई-जून
इन महीनों में गर्मी का प्रकोप ज्यादा रहता है। अत: ज्यादा घूमना-फिरना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। बासी भोजन से परहेज करें, क्योंकि ऐसा करने से शरीर में बहुत से रोग हो सकते हैं। गर्मी से ठंडक के लिए इस माह में छाछ में थोड़ा नमक मिलाकर पीना अच्छा होता है। प्यास बुझाने के लिए तरबूज, ककड़ी, खीरा, अनन्नास, संतरा, अंगूर, आम, बेल का सेवन करें। नारियल पानी पिएंं।

जून-जुलाई यानी आषाढ़
इस महीने में हरी साग-सब्जियों के सेवन से भी बचना चाहिए। अगर साग का सेवन करे भी, तो उचित साफ-सफाई का ध्यान रख्‍ाें। नमक मिले पानी से धोना सही रहता है। इस समय हाइजीन का ख्याल रख्‍ाें। नींबू की शिकंजी या शरबत जो घर की बनी हो, इस्तेमाल करें।

जुलाई-अगस्त यानी श्रावण

उमस भरे इस महीने में बीमार लोगों को केवल दाल और खिचड़ी खानी चाहिए। हरी साग-सब्जियों तथा दूध का सेवन कम करें। नाशपाती, खीरा, जामुन आदि मौसमी फल इस महीने में खाना श्रेयस्कर है। सुबह उठकर टहलें।

अगस्त-सितम्बर यानी भाद्रपद
इस महीने में मोटे अनाज जैसे, ज्वार, बाजरा, मक्‍के आदि को आहार में शामिल करें। अगर जौ मिले, तो इसे भी खाने में शामिल कर सकते हैं। हालांकि इन दो महीनों में छाछ, दही खाने से मना किया जाता है, लेकिन आप ताजा दही खा सकते हैं, अगर एलर्जी की समस्या न हो तो।

आश्विन यानी सितम्बर-अक्तूबर
इस महीने में गुड़ का सेवन करें। अगर गीला गुड़ मिले, तो आैर भी अच्छा रहेगा। बादाम, काजू, अखरोट जैसे मेवों का सेवन इस महीने में सेहत के लिए ठीक रहता है। आहार हल्का और सुपाच्य ही लें। तुरई, पालक, कद्दू और बैंगन पकाकर खाएं।

अक्तूबर-नवंबर यानी कार्तिक
हल्की सर्दी का अहसास कराता यह मौसम सेहत के लिए अच्छा होता है। इस समय मूली, केला, सेब, अंगूर, नाशपाती का सेवन करना सेहत के लिए ठीक होता है। दूध को हल्का गर्म करके पीना चाहिए।
विज्ञापन

अगहन यानी नवंबर-दिसंबर

इस मास में सर्दी पड़ने लगती है, इसलिए इस समय ठंडे पेय पदार्थों का सेवन न करें। वॉकिंग के उपरांत गुनगुने पानी से नहाएं। नए चावल, चिउड़ा, खजूर, बाजरे की रोटी, नारियल, हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें।

पौष बोले तो दिसंबर-जनवरी
दिसंबर यानी सर्दी का महीना। इस मास में तिल, अदरक, धनिया, पुदीना, गाजर, मटर आदि का सेवन करें। तिल तेल की मालिश अच्छा होता है। हरी सब्जियां खूब खाएं।

जनवरी-फरवरी में माघ
इस महीने में देसी घी का सेवन सही रहता है। मौसमी सब्जियों और फल के अलावा आप बादाम, अखरोट आदि भी खा सकते हैं। आयुर्वेद में शरीर को स्वस्थ रखने के लिए खाने से संबंधित कई नियम बताए गए हैं। इन्हीं नियमों के अंतर्गत हर महीने के लिए कुछ ऐसी चीजें बताई गई हैं, जिन्हें जरूर खाना चाहिए।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें