आमतौर पर ठंड के दिनों में छींकने का मतलब सिर्फ सर्दी-जुकाम होता है लेकिन छींक की वजह सेक्स या धूप हो, ऐसा आपने कहीं नहीं सुना होगा। जानिए अपनी छींक से जुड़े ऐसे कई फैक्ट्स के बारे में जिनकी जानकारी आपको यकीनन चौंकाएगी।
सेक्स के बाद भी आती है छींक
जानकर आपको अचरज होगा लेकिन छींकने की वजह सेक्स भी हो सकता है। शोधों की मानें तो सेक्स के दौरान पैरासिंपेथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय हो जाता है जिससे सेक्स के बाद कई बार अधिक छींक आती है।
छींकने का नसों से है संबंध
छींकने का संबंध दिमाग की उन नसों से है जो शरीर को संकेत देती हैं कि नाक में कुछ फंस रहा है जो छींकने के रास्ते ही बाहर निकल सकता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि अलग-अलग तरह की छींक के पीछे भी दिमाग के अलग-अलग तरह के सिग्नल हैं।
प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाती है छींक
कई शोधों में यह अब प्रमाणित हो चुका है कि छींकने से शरीर के हानिकारक जर्म बाहर निकलते हैं और यह प्रतिरोधी तंत्र की प्रक्रिया का जरूरी हिस्सा है। सेहतमंद जीवन के लिए छींक का आना भी जरूरी है।
छींक की स्पीड का जवाब नहीं
शोधों की मानें तो छींक की गति प्रति घंटा 100 मील की होती है। यही वजह है कि एक छींक से करीब एक लाख शरीर के कीटाणु हवा में तेजी से फैलते हैं।
आइब्रो बनवाने पर आती है छींक
भौंहों को शेप देने के लिए कई बार भौंहों के बाल तोड़ने पर भी छींक आ जाती है। दरअसल, भौहों के ठीक नीचे जो नस होती है व श्वास नली से जुड़ी होती है। इससे जुड़ी किसी भी गतिविधि की प्रतिक्रिया यह नस छींक के रूप में देती है।
आप नींद में नहीं छींकते हैं
जब आप सोते हैं तो आपके साथ छींक से जुड़ी नसों को भी आराम मिलता है इसलिए कभी भी नींद के दौरान आपको छींक नहीं आ सकती है। या यू कहें कि छींकने की स्थिति में आपको नींद ही नहीं आएगी।
धूप से आ सकती है छींक
छींक सिर्फ ठंड में ही नहीं धूप से भी हो सकती है। कुछ शोधों में माना गया है कि तेज धूप से छींक की नसें सक्रिय हो जाती हैं जिससे बिना मौसम के धूप में चलते वक्त भी छींक आ जाती है।