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हाउसवाइफ से होममेकर के सफर में गायब होती नींद

Fri, 24 May 2013 05:15 PM IST
किरण मिश्रा
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हर दिन की तरह सुबह उठते ही महिलाओं की दिनचर्या शुरू होती है उनके किचन से। और इस तरह पूरे दिन वो लगातार बिना थके घर और ऑफिस को मैनेज करने में लगी रहती हैं।
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सबकी जरूरतों को पूरा करते हुए वो अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभाती रहती हैं। पर इन सब के बीच अगर कुछ खो जाता है, तो वह है उनकी नींद। काम, काम और काम! बस नहीं है, तो उनकी जिंदगी में चैन, नींद और आराम! विगत कुछ सालों की रिपोर्ट्स भी बताती हैं कि महिलाओं में अनिद्रा की समस्या लगातार बढ़ रही है। वो अनिद्रा की शिकार हो रही हैं।

एक्सपर्ट भी बताते हैं कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को ज्यादा नींद की जरूरत होती है, लेकिन परिवार या ऑफिस की जिम्मेदारियों के चलते वे ऐसा नहीं कर पातीं। जिसका सीधा असर उनके व्यक्तित्व या व्यवहार पर पड़ता है।
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कम नींद की वजह से हृदय रोग, स्ट्रोक, मोटापा बढ़ना, डिप्रेशन जैसी साइकोलॉजिकल प्रॉब्लम्स की आशंका बढ़ जाती है। यह सिर्फ भारतीय महिलाओं में ही नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया में है। महानगरों से लेकर कस्बों तक की महिलाओं को भी नींद न आने की शिकायत है।
 
नई जीवनशैली की देन है अनिद्रा मनोवैज्ञानिक भावना वर्मी कहती हैं कि आज हर दूसरी-तीसरी महिला में नींद न आने की शिकायत है। हालांकि नींद न आने के कई कारण है, लेकिन मौजूदा समय में महिलाओं पर घर और ऑफिस की दोहरी जिम्मेदारी आने के कारण उत्पन्न तनाव और मानसिक परेशानियों ने ज्यादातर महिलाओं की आंखों से नींद चुरा ली है।

महिलाओं को एक साथ कई रोल में खुद को साबित करने की चुनौती रहती है। जैसे पत्नी, मां, बहू, बहन। अलग-अलग रोल में इन पर परिवार की देखभाल की जिम्मेदारी तो होती ही है, ऑफिस के प्रति जवाबदेही भी होती है। इन सब के बीच उनको अपने लिए समय ही नहीं बचता।

इन तमाम चिंताओं से जूझते रहने की वजह से वे अच्छी नींद भी नहीं ले पातीं। धीरे-धीरे यही स्थिति उनमें तनाव पैदा करने लगती है, जो अनिद्रा का कारण बनती है। और रही सही कसर इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स ने पूरी कर दी है।

टीवी, कंप्यूटर और मोबाइल से देर रात तक चिपके रहने की आदत का असर नींद पर पड़ने लगता है। भागदौड़ के बीच हम शायद यह भूल जाते हैं कि नींद का एक अपना चक्र है। इस अवधि में अगर आप रोजाना सोते हैं, तो नींद अच्छी आती है। लेकिन इस रुटीन में अगर थोड़ा भी बदलाव करते हैं, तो नींद में खलल पड़ता है।

कम नींद के हैं खतरे हजार
कम नींद यानी ज्यादा बीमारी! विशेषज्ञ बताते हैं कि शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए पर्याप्त नींद हर उम्र के लोगों के लिए जरूरी है।

कम नींद की वजह से कई तरह की समस्याएं उत्पन्न होती हैं, जिनमें स्मरण शक्ति का कमजोर होना, घबराहट, सुस्ती, तनाव, मोटापे की समस्या, मधुमेह, हृदयरोग आदि परेशानियां मुख्य हैं। इसलिए स्वस्थ जीवन के लिए पर्याप्त नींद हर किसी को चाहिए।

एक शोध के मुताबिक 93 फीसदी लोगों को नींद की कमी की शिकायत है। इनमें से महज दो फीसदी लोग ही चिकित्सक के पास जाते हैं। लेकिन तन-मन से स्वस्थ रहना है, तो चाहिए एक अच्छी नींद।
 
डॉ. भावना कहती हैं कि नींद संबंधी किसी भी समस्या से छुटकारा पाना है, तो आपको अपनी जीवनशैली में पॉजिटिव बदलाव लाने होंगे। जैसे, अपने सोने और जागने का एक निश्चित समय तय करें। धीरे-धीरे जब आपको इसकी आदत हो जाएगी, तो अपने आप उस समय आपको नींद आने लगेगी। रात ज्यादा देर तक न जागें। इससे नींद गायब हो जाती है।
 
अच्छी नींद के लिए स्लीप हाइजीन इम्प्रूवमेंट टेक्नीक की मदद लें। अगर आप थकी हैं, तो सोने से पहले हल्के गुनगुने पानी से नहाएं। अगर आप नहाना नहीं चाहती हैं, तो गर्म पानी में रॉक सॉल्ट डालकर पैरों को दस मिनट के लिए रखें।

इससे भी रात में नींद अच्छी आती है। एड़ियों और अंगुलियों में गुनगुने तेल की मालिश भी नींद के लिए कारगर है। सोने से पहले गुनगुना दूध लेना भी आपको रिफ्रेश करता है। इसके अलावा डीप ब्रीदिंग, मेडिटेशन करना भी आपके लिए फायदेमंद रहेगा।

और भी हैं कई उपाय  
महिलाएं पुरुषों की तुलना में ज्यादा संवेदनशील होती हैं। इस वजह से वो शीघ्र ही किसी भी बात को लेकर चिंतित  रहने लगती है और साथ में काम का बोझ।

ये सारे कारण उनमें तनाव बढ़ाने के लिए काफी हैं। तनाव से ग्रस्त होने के कारण उनमें नींद की शिकायत रहने लगी है।

ऐसे में जरूरत है अपनी लाइफ को संतुलित करने की। आपके पास जो है, उसी में संतुष्ट होना सीखें। अपनी अपेक्षाओं को इतना विस्तार न दें कि पूरी न होने की स्थिति में आपको दुख हो। ऐसा होने पर आपकी आंखों से नींद उड़ भी सकती है। तन और मन की थकान कम करने के लिए मनपसंद मधुर संगीत सुनें।
 
सोने से पहले या शाम के समय ज्यादा कॉफी या चाय न लें, क्योंकि चाय और कॉफी में कुछ ऐसे तत्व होते हैं, जो मस्तिष्क को जागृत कर देते हैं। और सबसे आखिर में आपको यह सलाह है कि नींद की दवाइयां अनावश्यक रूप से न लें। नींद को जीतने के लिए नेचुरल तरीके अपनाएं।

क्या कहते हैं आंकड़े
- 30 प्रतिशत कामकाजी कम महिलाएं नींद की समस्या से गुजर रही हैं। जिसमें नाइट शिफ्ट या अलग-अलग शिफ्ट्स में काम करने वाली महिलाओं में यह समस्या आम है।
 
- 30-40 साल की महिलाओं में नींद की समस्या आम है, क्योंकि इस दौर में उनके सामने घर के साथ-साथ काम में भी अच्छा प्रदर्शन करने का बेहद दबाव होता है।  

- एक शोध में शामिल 55 फीसदी लोगों ने काम के तनाव के कारण नींद के प्रभावित होने को स्वीकार किया। इसमें 67.1 फीसदी लोग सोने से पहले मोबाइल या सोशल साइट्स पर चैट करते हैं। 43.2 फीसदी लोग इंटरनेट पर गेम खेलने या चैट करने की वजह से आधी रात के बाद सोते हैं।
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